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Success Story : तीरंदाजी में भूमिका चौधरी ने जीता स्वर्ण व रजत, चित्तौड़गढ़ में जश्न का माहौल, खुशी से झूमे पिता

Success Story : बड़ीसादड़ी. भूमिका चौधरी ने अपनी अचूक निशानेबाजी से स्वर्ण व रजत पदक जीतकर चित्तौड़गढ़ जिले का नाम रोशन कर दिया है। जिले के 17 खिलाड़ियों ने शत-प्रतिशत क्वालीफाई कर मेवाड़ की माटी का डंका पूरे राज्य में बजा दिया।
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चित्तौड़गढ़

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Sanjay Kumar Srivastava

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अरुण कंठालिया

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Oct 12, 2026

bhumika chaudhary success story in archery chittorgarh celebrates

Success Story : बड़ी सादड़ी. तीरंदाजी में स्वर्ण पदक विजेता भूमिका चौधरी व पूरी विजेता टीम। फोटो पत्रिका

Success Story : बड़ीसादड़ी. मेवाड़ की सदियों पुरानी तीरंदाजी परंपरा और पक्के इरादों ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। 70वीं राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता (अंडर-14) में सीतामाता की तलहटी और बड़ीसादड़ी के केवलपुरा निवासी प्रतिभावान भूमिका चौधरी ने अपनी अचूक निशानेबाजी से स्वर्ण व रजत पदक जीतकर चित्तौड़गढ़ जिले का नाम रोशन कर दिया है। श्रीगंगानगर के पदमपुर में आयोजित इस मुकाबले में जिले के 17 खिलाड़ियों ने न सिर्फ शत-प्रतिशत क्वालीफाई किया, बल्कि मेवाड़ की माटी का डंका पूरे राज्य में बजा दिया।

कंपाउंड राउंड में भूमिका का डबल धमाल

भूमिका चौधरी ने कंपाउंड राउंड की रैंकिंग में 630/720 अंक हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया। इसके बाद एलिमिनेशन टॉप स्कोरर राउंड की अंतर्स्पर्धा में 136 के मुकाबले 139/150 अंक जुटाकर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। प्रतियोगिता के इंडियन राउंड में छात्रा वर्ग से काजल कुमारी (534), चिया कुमारी (521), अदिति (467) व भूमिका जोशी (320), और छात्र वर्ग से पीयूष जाट (536), भावेश जोशी (526), कुलदीप जाट (452) व मोहितेश जोशी (411) ने बेहतरीन स्कोर किए।

वहीं हनुमानगढ़ में आयोजित अंडर-17 व 19 वर्ग में भी अर्पित जाट, परम जोशी (528) व अंकित जोशी (459) समेत अन्य खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। उल्लेखनीय है कि 2012 से तीरंदाजी में भाग ले रहे जिले के खिलाड़ियों का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ और ऐतिहासिक परिणाम है।

जहां खेत ही बन गया खिलाड़ियों का स्टेडियम

इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे अनुशासन, नियमित अभ्यास और एक अनूठी सोच छिपी है। दूरदराज के शहरों में महंगे प्रशिक्षण की मजबूरी को दरकिनार करते हुए विष्णुगुप्त उच्च प्राथमिक विद्यालय के संस्थापक बालमुकुंद जोशी ने अपने निजी खर्चे पर खेत पर ही खेल मैदान तैयार कर दिया। राष्ट्रीय स्तर के कोच सुनील के मार्गदर्शन में यहां बच्चे रोज शाम को पसीना बहाते हैं। बालमुकुंद जोशी ने राष्ट्रवादी सोच और मेवाड़ की विरासत को बचाने के लिए यह अनूठी पहल की। इसके अलावा तरनाओ का खेड़ा (कपासन) में शिक्षक धीरेंद्र कछावा के मार्गदर्शन में भी खिलाड़ी लगातार चमक रहे हैं।

परिवार का संबल और संघर्ष

तीरंदाजी एक बेहद खर्चीला खेल है, जिसमें महंगे उपकरणों की जरूरत होती है। भूमिका के पिता चंद्रशेखर चौधरी बताते हैं कि बेटी की इस उपलब्धि से पूरे परिवार व गांव में खुशी की लहर है। रात-दिन पूरा परिवार बच्चों के सहयोग के लिए तत्पर रहता है, क्योंकि पैरेंट्स का संबल ही बच्चों को इस मुकाम तक पहुंचाता है। ग्रामीण परिवेश की इस बेटी की सफलता आज हर युवा के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

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