
Havaldar Gajendra Singh tiranga yatra. Photo- Patrika
चित्तौड़गढ़। 'पापा, आप तो एक नवंबर को सूबेदार बनकर घर आने वाले थे ना… फिर इस बक्से में क्यों सोए हो?' तिरंगे में लिपटे पिता के पार्थिव शरीर को देखकर मासूम बेटी के मन में उठे इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था। एक तरफ एक साल की सौम्या थी, जिसे शायद अभी बिछड़ने का मतलब भी नहीं पता, तो दूसरी तरफ बड़ी बेटी कीर्ति राज की आंखों में पिता को खोने का दर्द था। घर में जिस दिन पदोन्नति की खुशियां मनाने की उम्मीद थी, उसी परिवार को शुक्रवार को अपने लाड़ले हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान को अंतिम विदाई देनी पड़ी। असम में ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था।
गंगरार उपखंड के सूरत सिंह जी का खेड़ा निवासी 41 वर्षीय हवलदार जितेंद्र सिंह चौहान का पार्थिव शरीर गुरुवार रात चित्तौड़गढ़ पहुंचा। शुक्रवार सुबह जब तिरंगे में लिपटा उनका शव पैतृक गांव लाया गया, तो माहौल गमगीन हो गया। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। गांव के लोगों के लिए भी यह विश्वास करना मुश्किल था कि देश की सेवा में जुटा उनका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
जितेंद्र सिंह ने वर्ष 2004 में भारतीय सेना में सेवा शुरू की थी। करीब 22 साल चार महीने के अपने सैन्य कार्यकाल में उन्होंने देश के प्रति समर्पण के साथ जिम्मेदारियां निभाईं। परिवार के लिए यह गर्व का क्षण होने वाला था कि इसी साल एक नवंबर को उन्हें हवलदार से सूबेदार पद पर पदोन्नति मिलनी थी। घर में उनके सूबेदार बनकर आने की प्रतीक्षा थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जानकारी के अनुसार, असम में ड्यूटी के दौरान ऑक्सीजन की कमी और हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। उनके जाने से वृद्ध माता-पिता, दोनों बेटियों और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। छोटे भाई ललित सिंह राजस्थान पुलिस में सेवारत हैं। एक भाई सेना की वर्दी में देश की सेवा करता रहा, तो दूसरा खाकी पहनकर अपना फर्ज निभा रहा है।
गुरुवार रात जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद शुक्रवार सुबह शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के साथ निकली यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। गंगरार क्षेत्र में मेड़ीखेड़ा, डेट, विश्राम कुटीर और कोर्ट चौराहे से यात्रा गुजरने के दौरान लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, जितेंद्र सिंह तेरा नाम रहेगा’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।
विधायक डॉ. सुरेश धाकड़, पूर्व जिला प्रमुख भेरूसिंह चौहान, पूर्व प्रधान शक्ति सिंह शक्तावत सहित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपखंड अधिकारी नेहा मिश्रा, तहसीलदार रजनी चौधरी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में अंतिम यात्रा के दौरान व्यवस्थाएं संभाली गईं।
पैतृक श्मशान घाट पर सेना और पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर सैनिक को अंतिम सलामी दी। दोपहर 2 बजकर 6 मिनट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई। भाई ललित सिंह और बेटियों ने मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
Updated on:
09 Oct 2026 06:11 pm
Published on:
09 Oct 2026 05:53 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
