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विराट के बचपने और युवाओं पर उसके असर से चिंतित हूं: द्रविड

राहुल द्रविड़ ने कहा है कि वह टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के आक्रामक व्यवहार को देखकर कई बार चिंतित हो जाते हैं
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Kuldeep Panwar

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Updated: 31 Oct 2017, 9:03 PM IST

worried Due to Virats childishness its impact on youth: Dravid

नई दिल्ली। पूर्व कप्तान और जूनियर क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने कहा है कि वह टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के आक्रामक व्यवहार को देखकर कई बार चिंतित हो जाते हैं, क्योंकि इसका युवाओं पर भी असर पड़ता है। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज ने कहा, मैं विराट की आक्रामकता को देखकर कई बार थोड़ा घबरा जाता हूं, लेकिन यह भी सच है कि यदि इस तरह से वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। द्रविड़ ने कहा, मेरा मानना है कि खेल अभी भी प्रदर्शन पर निर्भर करता है, इसलिए विराट जैसे खिलाड़ी को इससे नहीं रोका जा सकता है, क्योंकि यह आक्रामकता उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ करने में मदद करती है। यह उनकी शख्सियत है। उन्होंने कहा, कई बार लोग मुझसे कहते हैं, मैंने ऐसा क्यों नहीं किया। लेकिन यदि मैं अपनी बाहों पर टैटू बनवा लेता तो मुझे नहीं लगता, इससे मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाता। यदि मैं ऐसा करता तो वह मेरी शख्सियत नहीं होती। मैं खुद से सच नहीं बोलता।

भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के कोच द्रविड़ ने कहा कि विराट की आक्रामकता उन्होंने खासकर ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज से पूर्व अधिक देखी है। उन्होंने कहा, ऑस्ट्रेलिया के साथ सीरीज से पूर्व विराट ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और जब मैं अखबार में उनके बयानों को पढ़ता हूं तो घबरा जाता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें इस तरह की प्रतिस्पद्र्धा पसंद है। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता।

जैसा भी व्यव्हार करे विराट आखिर में कामियाब होते है।
पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने कहा, विराट मैदान पर जैसा भी व्यवहार करें, आखिर में वह अपने लक्ष्य में कामयाब हो जाते हैं और वह उसी तरह से व्यवहार करते हैं, जो उन्हें अच्छा खेलने में मदद करता है। यदि अजिंक्य रहाणे को देखें तो वह काफी अलग हैं और वह मैदान पर अलग चीजें करते हैं। मुझे लगता है कि यही वास्तविकता है, जो हर खिलाड़ी के लिए सबसे अहम होती है। द्रविड़ ने कहा, यदि विपक्षी टीम को उकसाने से विराट का सबसे अच्छा खेल बाहर आता है तो अच्छी बात है और यह इसलिए भी है, क्योंकि वह दुनिया में फिलहाल सबसे अच्छे क्रिकेटरों में हैं तो उन्हें इसके लिए दोष नहीं दिया जा सकता है।

जूनियर क्रिकेटर भी विराट की इस आक्रामकता की नकल करने का प्रयास करते हैं।
जूनियर टीम के कोच ने हालांकि माना कि वह इस बात से थोड़े चिंतित जरूर हैं कि कई बार जूनियर क्रिकेटर भी विराट की इस आक्रामकता की नकल करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, मुझे इस बात से काफी चिंता होती है कि विराट का मैदान पर जिस तरह का व्यवहार रहता है, कई जूनियर खिलाड़ी उसकी नकल करने का प्रयास करते हैं। द्रविड़ ने कहा, यह मेरे लिए बहुत डरावना है कि बच्चे विराट की तरह नकल करें। 12, 13 और 14 साल के छोटे बच्चे भी विराट की तरह बनना चाहते हैं और अपनी वास्तिविकता को भुलकर दूसरे की तरह बनने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनका मूल खेल और व्यवहार नष्ट हो रहा है। पूर्व कप्तान ने साथ ही माना कि भारतीय खिलाडिय़ों में मौजूदा समय में जो आत्मविश्वास दिखता है, उसकी बड़ी वजह भारतीय बोर्ड के पास वित्तीय सुरक्षा और खिलाडिय़ों को मिलने वाली मोटी कमाई और आर्थिक सुरक्षा भी है।

जूनियर खिलाडिय़ों को शुरुआती स्तर पर एजेंट की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, जब मैंने शुरुआत की थी तो मैं अपने शुरुआती दौरों को लेकर बहुत उत्साहित होता था और हम सोचते थे कि यदि सीरीज में एक भी टेस्ट जीतेंगे तो सौभाग्यशाली होंगे। लेकिन आज टीम से जीतने की उम्मीद की जाती है। द्रविड़ ने साथ ही जूनियर खिलाडिय़ों को शुरुआती स्तर पर ही एजेंट नहीं रखने पर भी सलाह दी। राष्ट्रीय जूनियर कोच ने कहा, मैं युवा खिलाडिय़ों को सबसे पहले कहना चाहता हूं कि आप जब तक बड़े स्तर तक न पहुंच जाएं आपको एजेंट की जरूरत नहीं है। विराट या महेंद्र सिंह धोनी को एजेंट की जरूरत है, क्योंकि वह बहुत उच्च स्तर पर हैं, लेकिन 17 या 18 साल के खिलाडिय़ों को फिलहाल इससे दूर रहकर अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए।