शहर के आमजन के साथ साथ गौसेवकों ने गाय की अंतिम यात्रा निकालने का निर्णय लिया। अनाश्रित गायों को लाने वाले रथ मे गाय का श्रृंगार कर रखा गया। लाल चुनरी औढ़ाकर अंतिम यात्रा निकाली गई। यात्रा में आगे बैंड बाजे चल रहे थे, तो कोई राम धुन गा रहा था। कोई गौमाता के जयकारे लगा रहा था। यात्रा भूतेश्वर मंदिर से शुरू होकर बड़ा बाजार, मंदिर-मस्जिद चौराहा, राय चौराहा, तीन बत्ती तिगड्डा से होते हुए मुक्तिधाम पहुंची।