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राजस्थान: गुजरातियों को भा रहा दौसा का बाजरा, इस बार 5 अरब से ज्यादा कारोबार की उम्मीद; कीटनाशक नहीं डालते किसान

दौसा के बाजरे की गुजरात और पंजाब समेत कई राज्यों में मांग बढ़ रही है। मोटे दाने, चमक और स्वाद के कारण पहचान बना रहे बाजरे से इस बार 5 से 6 अरब रुपए की कमाई का अनुमान है। मंडियों में रोजाना 30-35 हजार कट्टों की आवक हो रही है।
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दौसा

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Arvind Rao

•

Oct 09, 2026

rajasthan bajra production

दौसा की कृ​षि उपज मंडी में लगे बाजरे के ढेर (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Bajra Production: दौसा जिले में इस बार बाजरे की बंपर आवक के बीच इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। खासकर गुजरात और पंजाब के व्यापारी दौसा के बाजरे को पसंद कर रहे हैं। यहां का बाजरा दाने के आकार, चमक और स्वाद के कारण गुजरात के बाजारों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। मंडी में आने वाले बाजरे की अच्छी गुणवत्ता को देखते हुए व्यापारी इसकी खरीद में रुचि दिखा रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार, दौसा क्षेत्र के बाजरे का दाना अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा मोटा और चमकदार होता है। इसके अलावा, इसका स्वाद भी अपेक्षाकृत मीठा होता है। मोटे अनुमान के अनुसार, इस बार दौसा जिले में करीब 5 से 6 अरब रुपए का बाजरा पैदा हुआ है। समय-समय पर हुई बारिश से भी फसल को फायदा मिला है। दौसा के अधिकांश किसान बाजरे की खेती में रासायनिक उर्वरकों का बहुत कम उपयोग करते हैं। कीटनाशकों का इस्तेमाल भी नाममात्र का होता है।

मंडी में बढ़ी आवक

इन दिनों दौसा मंडी में बाजरे की अच्छी आवक हो रही है। बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, दौसा मंडी में प्रतिदिन औसतन 30 से 35 हजार कट्टे बाजरा आ रहा है। इसी तरह लालसोट, बांदीकुई, मंडावरी और रामगढ़ पचवारा सहित जिले की अन्य मंडियों में भी बाजरे की अच्छी आवक हो रही है। अभी कुछ जगहों पर फसल की कटाई अंतिम दौर में है।

बाजरे को क्यों कहते हैं सुपरफूड

बाजरा पोषक तत्वों से भरपूर अनाज माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस और अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं। फाइबर की अधिक मात्रा के कारण यह पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। बाजरा प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, इसलिए ग्लूटेन से परहेज करने वाले लोग भी इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। सर्दियों में बाजरे की रोटी, खिचड़ी और अन्य व्यंजन विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं। पौष्टिकता और स्वाद के कारण बाजरे की मांग अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही है।
-डॉ. शंभूदयाल शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सक

व्यापारियों की जुबानी

बांदीकुई मंडी से बाजरा पंजाब, हरियाणा, गुजरात सहित अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इसके अलावा, दक्षिण भारत के लिए भी बाजरा भेजा जा रहा है, जो हिंडौन से ट्रेन की रेक के माध्यम से जाएगा।
-राजेंद्र विजय, व्यापारी, कृषि उपज मंडी, बांदीकुई

पशु आहार और मुर्गी दाने के लिए बाजरा पंजाब भेजा जा रहा है। वहीं, खाने के लिए गुजरात, तमिलनाडु और अन्य जगहों पर इसकी मांग है। बाजरे से बिस्किट, सेरेलेक और अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं।
-अमित माचीवाल, व्यापारी, दौसा

यहां भी जा रहा बाजरा

  • पंजाब
  • जम्मू-कश्मीर
  • हरियाणा
  • मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश
  • तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश

ऐसे समझें 5 अरब रुपए का गणित

  • बाजरे का कुल रकबा: 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर
  • प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन: 16 क्विंटल
  • कुल उत्पादन: 24 लाख क्विंटल
  • औसत भाव: 2,100 से 2,500 रुपए प्रति क्विंटल
  • कुल अनुमानित मूल्य: करीब 5 से 6 अरब रुपए