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‘होटल की नहीं, गांव के चूल्हे की चाय पीऊंगा’, नाना पाटेकर का राजस्थान से जुड़ा दिलचस्प किस्सा, जब इंटरव्यू से पहले रखी थी शर्त

गुलाबी नगरी जयपुर से अभिनेता नाना पाटेकर की कई खास यादें जुड़ी हैं। साल 2009 में कुकस के एक होटल में इंटरव्यू से पहले उन्होंने पत्रकार के साथ कैरम खेला और चुटकी लेते हुए कहा, खेल पर ध्यान दो, मैं रानी कवर कर रहा हूं।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Oct 09, 2026

nana patekar rajasthan connection

जयपुर से जुड़ी नाना पाटेकर की यादें (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

Nana Patekar Rajasthan Connection: जयपुर: होटल में प्रशंसकों की भीड़, सामने नाना पाटेकर और एक पत्रकार का इंटरव्यू का आग्रह…जवाब आया, 'कैरम खेलना आता है?' इंटरव्यू बाद में, पहले कैरम। जयपुर में साल 2009 का यह छोटा-सा वाकया आज नाना पाटेकर की यादों में एक अलग तस्वीर बनकर सामने आता है।

'खेल पर ध्यान दो, देखो- मैं रानी को कवर कर रहा हूं'

अनीस बज्मी की फिल्म की शूटिंग से पहले कूकस के एक होटल में नाना पाटेकर प्रशंसकों के बीच बैठे थे। बातचीत, हंसी-मजाक और सहज अंदाज के बीच जब उनसे इंटरव्यू के लिए कहा गया, तो उन्होंने कैरम की बाजी शुरू कर दी। खेल के दौरान जब सवाल किया गया, तो उन्होंने बात को फिर खेल की ओर मोड़ दिया, 'खेल पर ध्यान दो। देखो, मैं रानी को कवर कर रहा हूं।'

पैकअप के बाद भी ग्रामीणों के बीच जाते

राजस्थान में 'शक्ति: द पावर' की शूटिंग के दौरान जैसलमेर, पुष्कर और जयपुर उनके शूटिंग ठिकाने रहे। पैकअप के बाद भी वे कई बार होटल के बजाय ग्रामीणों के बीच रुक जाते थे। इस साल मई में धौलपुर में हुई शूटिंग के दौरान भी यही अपनापन दिखा। बेसना गांव में उन्होंने स्टाफ की चाय के बजाय गांव वालों के चूल्हे की चाय पीने पर जोर दिया। राजस्थान में नाना की यही सहजता उनकी यादों को और गहरा कर गई।

शूटिंग के लिए आए तो निजी कार्यक्रम में भी पहुंचे

जयपुर से उनका जुड़ाव सिर्फ इस एक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। फिल्म वितरक राज बंसल के अनुसार, फिल्म 'हम दोनों' की शूटिंग के दौरान नाना उनके शादी की सालगिरह के समारोह में पहुंचे थे। उन्होंने बंसल दंपती को शुभकामनाएं दीं और अगले दिन शूटिंग में साथ आने का निमंत्रण भी दिया।

सिनेमाई सफर और यादगार लम्हे

सिगरेट छोड़ने की प्रेरणा: बड़े बेटे की मौत के बाद नाना को गहरा सदमा लगा था और वे दिन में 60 सिगरेट पीने लगे थे। एक दिन बहन ने उन्हें खांसते हुए देखकर कहा, 'अभी मुझे और क्या-क्या देखना है?' बहन की बात सुनकर उन्होंने सिगरेट छोड़ दी।

जब सलमान खान को पछाड़ा: साल 1994 में सलमान खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म 'हम आपके हैं कौन' बॉक्स ऑफिस पर सबसे आगे थी, लेकिन उस साल बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड नाना पाटेकर को मिला।

जब पेट में घुसा चाकू: फिल्म 'सलाम बॉम्बे' के क्लाइमेक्स सीन में किरदार कृष्णा (शफीक सैयद) नाना पाटेकर के किरदार को चाकू मारता है। सीन के दौरान नाना के पेट में सचमुच चाकू घुस गया था।

दिया गया पद्मश्री: उन्होंने तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और चार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 'परिंदा' और 'अपहरण' के लिए उन्हें बेस्ट विलेन तथा 'नटसम्राट' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।

रोल ऑफर किया, मिली गालियां: अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने नाना को बी. आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा था। रवि चोपड़ा ने अपनी फिल्म के लिए उन्हें दुष्कर्म के आरोपी का किरदार निभाने का प्रस्ताव दिया। यह प्रस्ताव सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां दे दीं।

इच्छा रह गई अधूरी: नाना पाटेकर शेखर सुमन के शो 'शेखर टुनाइट' में आने वाले थे, लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। शेखर ने एक इंटरव्यू में बताया कि नाना ने खुद उनका शो देखा था और तारीफ करते हुए कहा था, 'बहुत अच्छा बोल रहे हो। मैं तुम्हारे शो में आना चाहता हूं।' लेकिन बाद में उनकी शूटिंग तय हो गई और वे शो में नहीं आ सके।

गोवा पुलिस ने क्यों दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस?

अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी मौत से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया चर्चा में है। गोवा पुलिस ने अभिनेता की मौत के मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का केस दर्ज किया है। इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस ने यह कदम क्यों उठाया और क्या इसका मतलब मौत के पीछे किसी संदिग्ध परिस्थिति का होना है? हालांकि, अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज होना अपने आप में किसी साजिश या गलत काम की पुष्टि नहीं करता।

BNSS की धारा 194 के तहत मामला दर्ज

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज किया है। इसकी जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर नितिन नाइक कर रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नाना पाटेकर को गोवा के डोना पाउला स्थित ओशन पार्क आवास से बाम्बोलिम के मणिपाल अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में उन्हें मृत अवस्था में पाया गया। पुलिस अब उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों और कारणों की पड़ताल कर रही है।

45 मिनट तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान

रिपोर्ट्स के अनुसार, 8 अक्टूबर की सुबह नाना पाटेकर को अपने घर पर सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद मेडिकल टीम को बुलाया गया। अभिनेता बेहोश मिले, जिसके बाद उन्हें सीपीआर दिया गया और अस्पताल पहुंचाया गया। मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की। अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक, तमाम प्रयासों के बावजूद अभिनेता को बचाया नहीं जा सका। उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। शुरुआती जानकारी में कार्डियक अरेस्ट की बात सामने आई थी।

परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज कर सकती है पुलिस

जांच के दौरान पुलिस परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी मौत के कारणों का पता लगाने में अहम होगी। दरअसल, अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत मौत की परिस्थितियों की जांच करती है। इसलिए केवल केस दर्ज होने के आधार पर किसी साजिश या आपराधिक घटना का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। जांच और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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