
घरेलू गैस सिलेंडर। फाइल फोटो- पत्रिका
LPG Connection Block: धमतरी जिले में पिछले तीन वर्षों से जारी ई-केवाईसी प्रक्रिया को नजरअंदाज करना एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ गया है। तेल कंपनियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1 अक्टूबर से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले 18 हजार से अधिक घरेलू गैस कनेक्शनों को सॉफ्टवेयर लॉक कर दिया है।
इस बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। खास बात यह है कि इस कार्रवाई की जद में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि जिले के कई जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी आए हैं। धमतरी शहरी क्षेत्र के एक दिग्गज जनप्रतिनिधि समेत जिले के 15 से अधिक अधिकारियों के कनेक्शन भी ब्लॉक कर दिए गए हैं।
यह बड़ी कार्रवाई 30 सितंबर तक पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा दी गई ढील समाप्त होते ही हुई। 1 अक्टूबर की सुबह प्रणाली में सॉफ्टवेयर लॉक लागू कर दिया गया। धमतरी जिले की 11 गैस एजेंसियों से कुल 2.31 लाख उपभोक्ता जुड़े हैं, जिनमें 1.36 लाख प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। बार-बार अल्टीमेटम, वार्ड स्तर पर लगाए गए शिविरों और घर-घर सूचना देने के बावजूद प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं के सामने अब रसोई का संकट गहरा गया है।
पोर्टल के बायोमेट्रिक और डुप्लीकेसी चेकिंग मॉड्यूल में जारी अपडेट के चलते जिले में पिछले चार महीनों से नए गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। नए आवेदकों, स्थानांतरित कर्मचारियों और नवविवाहित जोड़ों को एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कंपनियों ने नियमों को कड़ा कर दिया है। अब शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के लिए अगली रिफिल बुकिंग की समय-सीमा समान रूप से 25 दिन तय कर दी गई है। इसके अलावा सिंगल सिलेंडर कनेक्शन को डबल सिलेंडर में बदलने की सुविधा पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
रिफिल बुकिंग की 25 दिन की सख्त समय-सीमा ने बड़े परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। 6 से 8 सदस्यों वाले परिवारों में 14.2 किलो का एक सिलेंडर महज 12 से 15 दिनों में खत्म हो जाता है। नियम के मुताबिक अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव है। यानी बाकी के 10 दिनों तक चूल्हा जलाने के लिए उपभोक्ताओं को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कंपनी ने राहत के नाम पर 10 किलोग्राम के फाइबर/छोटू सिलेंडर का कनेक्शन लेने का विकल्प तो दिया है, लेकिन इसकी रिफिलिंग का गणित आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है।
14.2 किलो वाले मानक रिफिल की कीमत 1022 रुपए है, जबकि 10 किलो वाले रिफिल के लिए उपभोक्ताओं से 1600 रुपए वसूले जाएंगे। यानी मजबूरी में छोटा सिलेंडर लेने पर उपभोक्ताओं को प्रति किलो दोगुने से भी अधिक दाम चुकाने पड़ेंगे। 25 दिन के नियम और महंगे रिफिल के इस दोहरे चक्रव्यूह से मध्यमवर्गीय और बड़े परिवारों का रसोई बजट प्रभावित हो रहा है।
जिला खाद्य अधिकारी बीके कोर्राम के मुताबिक, ब्लॉक हुए कनेक्शनों को अनब्लॉक करने का एकमात्र जरिया बायोमेट्रिक ई-केवाईसी ही है। उपभोक्ता को स्वयं एजेंसी पहुंचकर फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन के जरिए प्रमाणीकरण कराना होगा। सत्यापन पूरा होते ही 24 से 48 घंटे के भीतर पोर्टल पर कनेक्शन स्वत: सक्रिय हो जाएगा।
Updated on:
03 Oct 2026 10:27 am
Published on:
03 Oct 2026 10:25 am
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