
दुर्ग . कौशल विकास पर करोड़ों खर्च के बाद बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल रहा। केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के तहत 4 साल में 16 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया जा चुका है। प्रशासन इस राशि से 27 हजार युवाओं को हुनरमंद बनाने का दावा करता है। पर आंकड़ों को देखें तो सिर्फ 40 प्रशिक्षित युवाओं को ही सरकारी नौकरी मिल पाई है, वहीं निजी क्षेत्र में 7678 को काम मिला है।
लाइवीलीहुड योजनाएं शुरू की गई
बेरोजगारों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोडऩे के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कौशल विकास और लाइवलीहुड योजनाएं शुरू की थी। वहीं केंद्र सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट एनिशिएटिव योजना के तहत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में वर्ष 2014 से तीनों योजनाएं संचालित की जा रही हैं। तीनों योजनाओं को मिलाकर हर साल करीब 7 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
फर्जी पंजीयन की शिकायत
तीनों ही योजनाओं में सरकारी व निजी संस्थाओं के माध्यम से बेरोजगारों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें निजी संस्थानों में व्यापक गड़बड़ी की शिकायत है। दरअसल पंजीयन और प्रशिक्षण के बाद संस्थानों को सीधे राशि भुगतान कर दिया जाता है। ऐसे में फर्जी पंजीयन व बिना प्रशिक्षण राशि निकाल लेने की शिकायत रहती है।
प्लेसमेंट का औसत करीब 54 फीसदी
सहायक संचालक मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना डी मुखोपाध्याय ने बताया कि योजना का मकसद बाजार के डिमांड के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर प्लेसमेंट कराना है। शासकीय नौकरी के अनुरूप ट्रेड इसमें शामिल नहीं है, इसलिए आंकड़ा कम दिख रहा है। जिले में प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट का औसत करीब 54 फीसदी है। यह प्रदेश की औसत स्थिति से बेहतर है। प्लेसमेंट के बाद 6 माह मॉनिटरिंग भी की जाती है।
प्रशिक्षण मिला पर नहीं मिल पाया रोजगार
मुख्यमंत्री कौशल विकास और स्किल डेवलपमेंट एनिशिएटिव योजना के तहत जिले में अब तक 27 हजार 851 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशासन के दावे को सच माने तो इनमें से अब तक 7 हजार 678 को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वहीं 14 हजार 544 बेरोजगारों को प्रशिक्षण के बाद भी रोजगार नहीं मिल पाया है।
अनुरूप पदों पर नहीं हो रही भर्ती
जिले के कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण के लिए 260 ट्रेड चिन्हित हैं, लेकिन इनमें से मुश्किल से 78 में बेरोजगारों को प्रशिक्षण दिया जा रहा। इनमें से भी अधिकतर युवा उन्हीं ट्रेडों में प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनकी तात्कालिक तौर पर डिमांड ज्यादा है, लेकिन प्रशिक्षण के अनुरूप पदों पर भर्ती नहीं हो रही।
Published on:
2 Apr 2018, 12:29 PM IST
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