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विदेशाें में उड़ा रहे देश का पैसा, जनवरी में किया सबसे अधिक खर्च

आरबीआर्इ ने अपने एक रिपोर्ट में कहा कि, भारतीय सबसे ज्यादा पैसे विदेशी विश्वाद्यालयों में पढ़ रहे अपने बच्चों के लिए भेज रहे हैं।
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नई दिल्ली

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Ashutosh Kumar Verma

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Updated: 26 Mar 2018, 10:46 AM IST

MONEY

नर्इ दिल्ली। देश के अमीरों को अब देश में पैसे रखना रास नहीं आ रहा है। उन्हें विदेशों में पैसे भेजना अौर खर्च करना सबसे ज्यादा भा रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी माह में भारतीयों ने दोगुनी रकम विदेशों में भेजा। ये आंकड़ा आरबीआर्इ ने जारी किया है। आरबीआर्इ ने अपने एक रिपोर्ट में कहा कि, भारतीय सबसे ज्यादा पैसे विदेशी विश्वाद्यालयों में पढ़ रहे अपने बच्चों के लिए भेज रहे हैं। वहीं इसके बाद टूरिज्म आैर विदेशों में निवेश के लिए भी पैसे भेजते हैं। जनवरी में भारतीयों द्वारा भेजे गए कुल रकम का एक तिहार्इ रकम अपने रिश्तेदारों के उपहर के तौर पर आैर भरण पोषण के लिए भेगा गया।


जनवरी में भेजा गया रिकाॅर्ड पैसा

रिजर्व बैंक ने अपने डाटा में कहा है कि, इस जनवरी में रिकाॅर्ड 1.2 अरब डाॅलर रकम विदशों में भेजा गया है। इस हिसाब से माैजूदा फिस्कल र्इयर के पहले 10 महीनों का हिसाब देखें तो कुल 8.17 अरब डाॅलर कर रेमिटेंस बनता है। ये पिछले फिस्कल र्इयर से दोगुना है। क्योंकि पिछले फिस्कल र्इयर के पहले 10 माह में ये आंकड़ा कुल 4.6 अरब डाॅलर का था।

हर साल 2.5 लाख डाॅलर भेजने की छूट

भारतीयों को अपने रिश्तेदारों को निवेश के साथ-साथ कुछ खास तरह के खर्च के लिए हर साल 2.5 लाख डाॅलर भेजने की छूट है। भारत से जितनी रकम विदेश भेजा जाता है उसका 90 फीसदी रकम गिफ्ट, विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों के लिए, टूरिज्म आैर पढ़ार्इ के नाम पर खर्च होता है। इसपर जानकारों का कहना है कि, इससे एक बात साफ हो गया है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा भारतीय विदेश जा रहे हैं। एचएनआर्इ भी अब बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं।


आउटफ्लो में बढ़ोतरी

देश के फाॅरेक्स रिजर्व 100 अरब डाॅलर होने के बाद आरबीआर्इ ने साल 2003 में रेजिडेंट इंडियंस को कर्इ मदों में अपने पैसे विदेश भेजने की इजाजत दिया था। शुरूआती दौर में इसकी सीमा 50,000 डाॅलर थी जो कि धीरे-धीरे बढ़कर 2,50,000 तक हो गया। हालांकि ये कर्इ सालों तक फाॅरेन आउटवार्ड रेमिटेंस 1 अरब डाॅलर से कम रहा। साल 2015 में आरबीआर्इ द्वारा कुछ ट्रांजैक्शन को शामिल किया गया था। अारबीआर्इ के इस फैसले के बाद आउटफ्लो में बढ़ोतरी देखने को मिला।