
किशोर कुमार को हॉलीवुड की फिल्में देखना पसंद था, वो अमेरिका से कई फिल्मों के कैसेट खरीद कर लाए थे। (फोटो सोर्स: डिजाइन पत्रिका)
Kishore Kumar Death Anniversary: बॉलीवुड में बहुत कम कलाकार ऐसे रहे हैं, जो सिंगिंग, एक्टिंग और डायरेक्शन हर क्षेत्र में माहिर रहे हों। कोई गायकी में पारंगत हुआ तो कोई अभिनय में तो किसी की निर्देशन क्षमता की कोई बराबरी नहीं कर सकता। मगर किशोर कुमार एक ऐसे मल्टीटेलेंटेड आर्टिस्ट थे, जो हर क्षेत्र में माहिर थे। उनकी गायकी जितनी शानदार थी, अभिनय उतना ही कमाल। उनके लिए यह कहना गलत नहीं होगा कि भले ही किशोर कुमार को गुजरे आज 39 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक उन जैसा कलाकार कोई दूसरा आया नहीं। महज 58 साल की जिंदगी में इंडस्ट्री में अलग मुकाम हालिस करने वाले किशोर कुमार का 13 अक्टूबर 1987 के दिन हार्ट अटैक के चलते मुंबई में निधन हो गया था। किशोर की खासियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनको गुजरे हुए 39 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी उनकी अदाकारी, गायकी पुरानी नहीं लगती, आज भी वो लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
चलिए आज उनकी 39वीं पुण्यतिथि पर उस गाने के बारे में बात करते हैं जिसको सुन कर रो पड़े थे दिग्गज गायक।
महान गायक किशोर कुमार के बेटे और गायक अमित कुमार के फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे मुकेश दादा का गाना सुनकर रोने लगे थे किशोर कुमार। अपने पिता के बारे बात करते हुए उन्होंने कहा, 'किशोर कुमार को रेडियो सुनना बहुत पसंद था और जब दूसरे गायकों के मुकाबले उनके गाने ज्यादा बजते थे, तो वे बहुत खुश होते थे। "वे किसी बच्चे की तरह कहते थे, 'मेरा गाना ज्यादा बजा।' लेकिन एक दिन उन्होंने फिल्म 'जिस देश में गंगा बहती है' से मुकेश जी का गाया हुआ गाना 'आ अब लौट चलें' सुना और बच्चे की तरह रोने लगे और बोले कि मैं खंडवा वापस जाना चाहता हूं। इसके आगे उन्होंने कहा, 'मेरे पिता असल में, दिल से एक गांव वाले ही थे।"
अमित कुमार ने कहा कि उनके पिता बहुत भावुक इंसान थे, लेकिन वे यह बात बहुत कम ही जाहिर करते थे। "वे अपना अंगूठा दिखाते हुए कहते थे, 'देखो, यह कितना अकड़ा हुआ है। मैं झुकता नहीं हूं।' लेकिन कुछ मौके ऐसे भी आए जब उनका यह मुखौटा हट गया। एक बार वे मशहूर कवि गौरी प्रसन्न मजूमदार का लिखा बांग्ला गाना 'ई तो जोबोन' रिकॉर्ड कर रहे थे। उस गाने में कहा गया था कि हिंसा, जलन और दुश्मनी - सब कुछ चिता पर जलकर राख हो जाता है। इस बात से वे इतने भावुक हो गए कि उन्होंने उस गाने के लिए पैसे लेने से ही मना कर दिया।"
किशोर कुमार असल में बहुत सादे इंसान थे और स्टारडम के दिखावे से दूर रहते थे। अमित कुमार ने बताया, 'पापा के बड़े भाई अशोक कुमार उर्फ दादा मुनि और मेरे ताऊजी अपने दौर में सुपरस्टार थे और अपने वर्ली वाले घर पर पार्टियां देते थे, जबकि पापा तब करियर की शुरुआत ही कर रहे थे। उन पार्टियों में बड़ी-बड़ी हस्तियां आती थीं। डैड शराब नहीं पीते थे, इसलिए वे हाजी अली की मुंडेर पर चले जाते थे और सुबह होने तक वहीं सोए रहते थे।"
अमित आगे कहते हैं, "वे गुस्सैल नहीं थे, लेकिन सख्त जरूर थे। जब वे घर लौटते, तो खबर फैल जाती थी कि 'साहब घर आ गए हैं'। वे सुबह जल्दी उठते थे और रात को जल्दी सो जाते थे। उन्हें असली बंगाली खाना पसंद था, जैसे पूरी-तरकारी, आलू-गोभी, मटन करी, कतला मछली और हिलसा करी।"
बीबीसी के अनुसार, अमित कुमार ने बताया कि उनके पिता को हॉलीवुड की फिल्में देखना बहुत पसंद था। एक बार वो अमरीका गए तो आठ हजार डॉलर की फिल्मों के कैसेट खरीद कर लाए थे। इसके साथ ही उन्होंने कि जब वो कलकत्ता से मुंबई आते थे तो वो और किशोर कुमार वीकएंड पर जाकर एक दिन में फ़िल्मों के तीन-तीन शो देखकर आते थे।
Updated on:
13 Oct 2026 02:02 pm
Published on:
13 Oct 2026 01:09 pm
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