
गुरदास-दलेर मेहंदी (फोटो सोर्स- IMDb)
Gurdaas Maan On Daler Mehndi Controversy: पंजाबी संगीत को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले दिग्गज गायक गुरदास मान ने दलेर मेहंदी से जुड़े हालिया विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने किसी कलाकार को किसी एक घटना के आधार पर जज करने से बचने की अपील की और कहा कि कलाकार भी इंसान होते हैं। उनके मुताबिक, कलाकार अपनी निजी परेशानियों, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने प्रशंसकों के लिए बेहतर करने की कोशिश करते हैं।
गुरदास मान ने ये बात 'ई टाइम्स' के साथ खास बातचीत में कही। इस दौरान उन्होंने बदलते म्यूजिक इंडस्ट्री ट्रेंड, प्लेबैक सिंगिंग से दूर होते गायकों, पुराने गानों के रीमिक्स और पंजाबी संगीत में सांस्कृतिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर भी बात की।
उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में 18 अक्टूबर 2026 को दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस के बाद विवाद खड़ा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान सुबोध उनियाल ने उनकी गायकी पर सवाल उठाए और उन पर नशे में होने का आरोप लगाया था।
इसी विवाद पर जब गुरदास मान से कलाकार की अपनी कला के प्रति जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि कलाकार की यात्रा बाहर से दिखाई देने के मुकाबले काफी जटिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि कलाकार भी इंसान हैं और उनके सामने निजी परिस्थितियां और चुनौतियां हो सकती हैं।
गुरदास मान ने कहा कि किसी स्थिति को समझते समय संवेदनशीलता रखनी चाहिए, कलाकार को संदेह का लाभ देना चाहिए और उचित प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए।
आज के दौर में संगीत के वायरल ट्रेंड और व्यावसायिक सफलता पर बढ़ते जोर को लेकर गुरदास मान ने कहा कि संगीत हमेशा अपने समय को दर्शाता रहा है। तकनीक ने कलाकारों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचने के नए अवसर दिए हैं।
हालांकि, उनके लिए किसी गाने का असली आधार आज भी धुन, अर्थपूर्ण शब्द और भावनाएं हैं। उनका कहना है कि कोई गाना रातोंरात लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक वही गीत लोगों के साथ रहता है जो दिल को छूता है। ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन भावनाओं की भाषा कभी पुरानी नहीं होती।
गुरदास मान ने प्लेबैक सिंगिंग को भारतीय संगीत परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, प्लेबैक सिंगर किसी किरदार को आवाज देकर फिल्म की भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाता है।
साथ ही उन्होंने माना कि हर कलाकार अपनी पहचान और रचनात्मकता को तलाशना चाहता है। उनका कहना है कि गायकों, संगीतकारों, गीतकारों और फिल्ममेकर्स के बीच आपसी सम्मान और खुलेपन से काम होगा, तो संगीत ज्यादा बेहतर बनेगा।
पुराने क्लासिक गानों के रीमिक्स पर गुरदास मान ने संतुलित राय रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी नए अरेंजमेंट के जरिए युवा पीढ़ी पुराने शानदार संगीत से जुड़ती है, तो यह अच्छी बात है। लेकिन रीमिक्स बनाते समय मूल गाने की भावनाओं, कविता और उसके दौर की संवेदनाओं का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने युवा संगीतकारों से पुराने संगीत से प्रेरणा लेकर कुछ नया बनाने की अपील की। उनके मुताबिक, हमारी जड़ें हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की ताकत देने के लिए हैं।
गुरदास मान ने पंजाबी संगीत की वैश्विक लोकप्रियता पर खुशी जाहिर की, लेकिन दोहराए जाने वाले बोल और लोक संगीत के प्रभाव में कमी को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि पंजाबी संगीत जहां भी पहुंचता है, वहां पंजाब की मिट्टी का एक हिस्सा भी पहुंचता है।
उनके मुताबिक, लोक परंपरा में भाषा, खेतों की लय, बुजुर्गों की समझ और लोगों की कहानियां शामिल हैं। आधुनिक संगीत और व्यावसायिक सफलता के लिए जगह होनी चाहिए, लेकिन गीतों में गहराई, गरिमा और विविधता भी बनी रहनी चाहिए।
गुरदास मान ने युवा कलाकारों को सलाह दी कि वे अपनी कला सीखें, वरिष्ठों का सम्मान करें, मेहनत करें और धैर्य रखें। उन्होंने कहा कि आज किसी गाने की सफलता को व्यूज और स्ट्रीमिंग नंबरों से मापा जा सकता है, लेकिन कलाकार की असली कीमत इस बात से तय होती है कि उसका काम लोगों की जिंदगी में कितनी जगह बनाता है।
उन्होंने कहा कि जल्दी मिलने वाली प्रसिद्धि कलाकार को उसकी शुरुआत की वजह नहीं भुलानी चाहिए। उनके मुताबिक, ईमानदारी, निरंतरता और अपनी कला के प्रति प्यार ही लंबे समय तक चलने वाली विरासत बनाते हैं।
Updated on:
29 Oct 2026, 5:48 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 5:46 PM IST
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