
nagin serial
टीवी की दुनिया में सभी 'इच्छाधारी नागिनों' के आगे झुकते नज़र आ रहे है। दरअसल, टीवी सीरियल 'नागिन' इस पिछले हफ्ते की टीआरपी में एक फिर सभी को पीछे छोड़ दिया है। एक दिन में रात 9 बजे के समय में 12.14% दर्शकों को अपनी तरफ़ ख़ींच कर नागिन ने अपना पहला स्थान बनाए रखा है। ब्रॉडकस्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) की 2016 के 14वें हफ्ते की रेटिंग में भी नागिन सीरियल्स में शीर्ष पर रहा है। आमतौर पर IPL के सीज़न में लोग फ़िल्म रिलीज़ करने से कतराते हैं और टीवी के धारावाहिकों को भी अच्छी टीआरपी नहीं मिलती, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है।
फ़िलहाल जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उनके हिसाब से 'नागिन' (कलर्स), 'कुमकुम भाग्य' (ज़ी), 'साथ निभानासाथिया' (स्टार) और 'ये है मोहब्बतें' (स्टार) जैसे धारावाहिक टॉप पर हैं। बीते 18 हफ़्तों से पहले 4 पायदानों पर यही धारावाहिक ऊपर नीचे हो रहे हैं। वहीं, सोनी चैनल पर कपिल शर्मा को भी कम ही सही, लेकिन TPR मिलनी शुरू हुई हो गई है। लेकिन सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात तो यही है कि टीवी की दुनिया मे इस वक्त पर इच्छाधारी पात्रों का जादू छाया हुआ है और जब तक उनके दर्शक हैं, तब तक निर्माताओं को ज्यादा दिमाग लड़ाने की जरूरत नहीं है।
वैसे हसीन-कमसिन इच्छाधारी नागिन औक उसका खूंखार बदले की कहानी छोटे पर्दे से पहले बड़े पर्दे पर खूब चली है। टीवी से पहले नागिनों ने सिनेमा के जरिए हमारे दिलों में दस्तक दी। 1954 में आई वैजयंती माला की नागिन का गीतकृमन डोले मेरा तन डोले तो उस साल का सरताज ही था।1976 की रीना रॉय की नागिन फिल्म ने कामयाबी के झंडे गाड़े और सेक्सी और आकर्षक नागिन को हमारे सिनेमा का हिस्सा बना दिया।
ऐसी ही चोट खाई नागिन 1986 में नगीना में नजर आई और जिसने हिंदी सिनेमा में एक दशक तक चिनगारी की तरह दबे रहे इच्छाधारी नागिन के कॉन्सेप्ट को फिर से जिंदा कर दिया। फिर 1989 में नगीना का सीक्वल निगाहें आई, पर फ्लॉप रही। नगीना के बाद तो जैसे इच्छाधारी नागिनों की बाढ़ ही आ गई। नाग और नागिन (1989), शेषनाग (1990), तुम मेरे हो (1990), नाचे नागिन गली गली (1989), जानी दुश्मन (2002) और हिस्स (2010) जैसी फिल्में आईं जो नाकाम रहीं पर तब तक बड़ा परदा अपने हिस्से के नाग-नागिनों को जी चुका था।साल 2007 में टीवी की पहली हिट नागिन सायंतनी घोष की एंट्री हुई।
आज भी टेलीविजन पर इच्छाधारियों का करतब दर्शकों के सिर चढ़ दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। यही वजह है कि एकता कपूर का कलर्स पर आ रहा 'नागिन' सीरियल लोकप्रियता के पायदान पर तेजी से चढ़ते हुए शीर्ष पर काबिज है।
कलर्स चैनल के प्रोग्रामिंग हेड मनीष शर्मा के मुताबिक वो दर्शकों को ऐसी कथाओं वाला संसार देना चाहते थे, जिन्हें वे अपने बचपन से सुनते आए हैं। नागिन में एक प्रभावी कहानी है। जबरदस्त ड्रामा है और अाधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी ने इसे हिट बनाया है. इसने टीवी पर नया ट्रेंड स्थापित कर दिया है।
अब तो छोटे परदे पर आलम यह है कि एक चैनल की नागिन को देखकर दूसरे चैनल वाला अपनी नागिन तैयार कर रहा है। इच्छाधारियों का जादू ऐसा चला कि कुछ अरसे के लिए हर चैनल तरह-तरह की इच्छाधारियों से पट गया। नीली छतरी वाले से लेकर ससुराल सिमर का तक में इच्छाधारी नागिनों का काला साया मंडराया दिखा तो। इच्छाधारियों से उभरी टीआरपी ने निर्माताओं को सेक्सी मोरनी से लेकर हसीन नेवले तक को इच्छाधारी बना डालने के लिए नचा डाला।
नागिन की लोकप्रियता को देखते हुए ऐंड टीवी ने भी अपने सीरियल में प्रयोग किया। वहीं, ज़ी टीवी पर हाल ही में विषकन्या शुरू हुआ है। मजेदार तथ्य ये भी है कि 'ग्लैमरस नागिनों' के फैन क्लब में सिर्फ महिलाएं ही नहीं हैं, बल्कि पुरुष और बच्चे तक इनके सम्मोहन में हैं। लोग इस बात से भी चौंक रहे है कि सीरियल में अब हर जानवर ठीक उसी तरह इच्छाधारी दिख है, जैसे एक वक्त 'चंद्रकांता' सीरियल में हर किरदार का जुड़वां निकल रहा था।
नागिन में शिवन्या का किरदार निभा रहीं मौनी रॉय के मुताबिक दर्शकों की उम्मीदों और पसंद पर खरा उतरना इतना आसान नहीं होता। इच्छाधारी नागिन होने के नाते, कई बार उन्हें सिंगल सीन में कई लुक लेने पड़ते हैं। इसके लिए कई कॉस्ट्यूम पहनने पड़ते हैं, अलग-अलग मेकअप और जंगल जैसी आउटडोर लोकेशंस में काम भी करना पड़ता है।
यही नहीं, उन्हें शो में डांस से लेकर ऐक्शन तक का सहारा लेना पड़ता है। यही वजह है कि जब बिग बॉस सीजन-9 आ रहा था और उसे सलमान खान होस्ट कर रहे थे, उस समय भी टीआरपी के मामले में सुपरस्टार नागिन से मात खा गए थे। इस बीच कई लोग सवाल ये भी उठाते हैं कि क्या ये टीवी पर अंधविश्वास को बढ़ावा देना नही हैं?
Published on:
17 May 2016 09:32 pm
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