
चंबल पुल पर ओवरलोडिंग के चलते टूटी मिली रोलर बियरिंग, मरम्मत में जुटी टीम ने रखी सच्चाई
इटावा. उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित चंबल नदी के पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर चल रही मरम्मत कार्य के दौरान जांच में रोलर बेयरिंग टूटा निकला। जिससे अब बेयरिंग नया उपलब्ध होने के बाद ही पुल पर आवागमन चालू हो सकेगा।
पुल में पड़ेगा नया बेयरिंग
यहां काम कर रहे बंधु ट्रेडर्स कंपनी के सुपरवाइजर संतोष कुमार ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त बेयरिंग का एक रोलर व सपोर्ट प्लेट टूटा निकल है जिससे बेयरिंग नया पड़ेगा। विभागीय अधिकारियों को बेयरिंग उपलब्ध कराने है उनसे कहा गया है। बेयरिंग उपलब्ध होने के बाद चार पांच दिन में कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। जबकि नेशनल हाईवे के एक्सईन एमसी शर्मा ने कहा है कि नए बेयरिंग उपलब्ध कराने हेतु संबंधित कंपनी को ऑर्डर दे दिया गया है। नई बेयरिंग उपलब्ध होने में समय लगेगा तब तक पुल के अन्य बेयरिंगो की जांच एवं अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सो के मरम्मत का कार्य जारी रहेगा। आवागमन चालू में अभी एक माह का समय भी लग सकता है। मालूम हो कि चम्बल पुल के पिलर संख्या 6 के दक्षिणी बीम का बेयरिंग क्षतिग्रस्त होने की जानकारी के बाद विभागीय अधिकारियों की मांग पर प्रशासन द्वारा 11 मई से पुल के दोनों हिस्सो में दीवार लगाकर पैदल व दुपहिया वाहनों के अतिरिक्त अन्य समस्त प्रकार के छोटे बड़े वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था।
यूपी और एमपी को जोड़ता है पुल
विभागों की अनदेखी के चलते जनता में हुए व्याप्त आक्रोश के बाद सोलह दिन बाद पुल पर कार्य शुरू हो सका था। शुक्रवार को पहुचीं बंधु ट्रेडर्स लखनऊ की कंपनी द्वारा पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के नीचे झूला आदि लगाकर रविवार को बेयरिंग को निकाल गया जो कि टूट हुआ निकला। यही नहीं उक्त बीम और पिलर के नीचे का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है। बताया गया है बेयरिंग पर अधिक दबाव पड़ने के बाद रोलर टूटने से बीम के नीचे हिस्से में पड़े दबाव से कई जगह क्रेक हो गया है। कंपनी के सुपरवाइजर संतोष कुमार का कहना है कि बेयरिंग नया लगाया जावेगा। वहीं बीम के नीचे आयी दरारे (क्रेक) को एपोक्सि प्लास्टर से भरकर ठीक किया जाएगा। उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच आवागमन का एक मात्र आसान माध्यम चंबल नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद 11 मई दोपहर 12 बजे के बाद से आवागमन बंद कर दिया गया।
ओवरलोडिंग के चलते पुल क्षतिग्रस्त
करीब चार दशक पूर्व स्थापित इस पुल की क्षमता 20-25 टन वजन सहने की थी। बीते दशक से बालू तथा गिट्टी भरे करीब 70- 80 टन वजन के वाहनों और डंपरों के बेतहाशा संचालन से यह पुल दर्जनों बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस बार दोनों ओर की एप्रोच धसक गई, इससे पुल जर्जर हालत में आ गया। चार दशक पूर्व चंबल पुल का निर्माण न होने तक इटावा-भिंड आने-जाने के लिए स्टीमर और नावों का प्रयोग करना पड़ता था। 1970 के आसपास चंबल पुल का लोकार्पण होने पर दोनों राज्य एक-दूसरे से परस्पर जुड़ गए थे। इससे आवागमन तो सहज हुआ ही साथ व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते और ज्यादा मजबूत हुए।
आम लोग भुगत रहे खामियाजा
तत्कालीन इंजीनियरों ने इस पुल का निर्माण कराने के दौरान अनुमान लगाया था, ज्यादा से ज्यादा बीस-पच्चीस टन वजनी वाहन आवागमन करेंगे। इसी क्षमता के अनुरूप पुल का निर्माण कराया था। बेतहाशा ओवर लोडिंग ने इंजीनियरों के अनुमानों को पलीता लगा दिया। डंपर और ट्राला ट्रकों के माध्यम से तीस से अस्सी टन वजन के वाहन इस पुल से गुजरने लगे। इसके चलते पुल के कई बार खंभों के नीचे लगे बेयरिंग टूटे। खामियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ा। कई-कई दिनों तक पुल वाहनों को आवागमन बंद रहा, जनता को पैदल ही पुल पार करना पड़ा।
Published on:
28 May 2018, 10:39 AM IST
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