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जिम्स में खुलेगी प्रदेश की पहली जीनोम सीक्वेंसिंग लैब, कोरोना के नए स्ट्रेन पर होगा शोध

Highlights - 28 फरवरी से पहले इसे शुरू करने का लक्ष्य - करीब दो करोड़ रुपए का खर्च आएगा - कोरोना वायरस के स्ट्रेन में हाेने वाले बदलाव पर किया जाएगा शोध
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ग्रेटर नोएडा

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lokesh verma

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Updated: 31 Dec 2020, 11:24 AM IST

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ग्रेटर नोएडा. राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) ग्रेटर नोएडा में प्रदेश की पहली जीनोम सिक्वेंसिंग लैब खोली जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने 28 फरवरी से पहले इसे शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यहां कोरोना वायरस के स्ट्रेन में हाेने वाले बदलाव पर शोध किए जाएंगे। इस लैब पर करीब दो करोड़ रुपए का खर्च आएगा। बता दें कि देशभर में जीनोम सिक्वेंसिंग की 10 लैब हैं।

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जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले में ब्रिटेन से आई एक महिला में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन की पुष्टि हुई है। वायरस के स्ट्रेन में आए बदलाव का पता लगाने के लिए मरीज के सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग लैब भेजा गया है। ऐसे में शासन स्तर पर बात करके लैब खोलने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कोविड-19 समेत छह तरह के वायरस पर शोध को लेकर भी बायो सेफ्टी लेवल-3 लैब बन रही है, जिसके लिए तीन करोड़ का वर्क ऑर्डर हो चुका है। मार्च तक इसे शुरू करने की योजना है।

वैक्सीन के दुष्प्रभावों की होगी जांच

बता दें कि ग्रेटर नोएडा के जिम्स में एडवर्स ड्रग रिएक्शन सेंटर बनाया गया है। यहां पर रिसर्च अधिकारियों की देखरेख में कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों पर रिसर्च होगा। प्रशासन के अनुसार अस्पताल में दो से तीन बूथ बनाए जाएंगे। वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्ति को आधे घंटे तक रोका जाएगा, ताकि वैक्सीन के दुष्प्रभावों की जांच की जा सके।

देशभर में 10 लैब

कोरोना वायरल के नए स्ट्रेन की रिसर्च के लिए फिलहाल नई दिल्ली, हैदराबाद, बंगलुरू और पुणे समेत 10 स्थानों पर जीनोम सिक्वेंसिंग लैब बनाई गई हैं। ग्रेटर नोएडा क जिम्स में खुलने वाली यह प्रदेश में पहली लैब होगी।

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