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‘धांय धांय धांय…’, 12 बोर की बंदूक से सूनी कर दी चाची की मांग, गुना में भतीजे ने किसी की नहीं सुनी

Land disputes: परिवारों के बीच जमीन विवाद खूनी संघर्ष में बदल रहे है। सारेठा में 500 बीघा के झगड़े में चाचा की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
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गुना

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Astha Awasthi

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Updated: 27 Oct 2026, 2:51 PM IST

क्राइम सीन, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

क्राइम सीन, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Guna news: बदलते दौर में जमीन पर कब्जे की लड़ाई में कहीं चाचा-भतीजे आमने-सामने हैं तो कहीं पड़ोसी और ग्रामीण एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन रहे हैं। शहर के कई थाना क्षेत्रों में जमीन विवाद लगातार खूनी संघर्ष में बदल रहे हैं। सारेठा गांव में करीब 500 बीघा जमीन के विवाद में चाचा की हत्या लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बीते तीन वर्षों में इन इलाकों में जमीन और वन भूमि पर कब्जे को लेकर छह हत्याएं हो चुकी हैं।

इसके बावजूद विवादित जमीनों के सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और दावों के निराकरण की ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई है। तीनों थाना क्षेत्रों में हर महीने जमीन विवाद की 5 से 6 शिकायतें पहुंच रही हैं। कई मामलों में एफआइआर तक दर्ज नहीं होती। नतीजा, जमीन का विवाद सुलझने के बजाय रंजिश में बदलता है और फिर जानलेवा हो जाता है।

500 बीघा के विवाद में ले ली जान

सिरसी थाना क्षेत्र के सारेठा गांव में रविवार 25 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे विजय सिंह यादव (40) अपने भतीजे शांतनु के साथ मोटरसाइकिल से खेत जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में भारत सिंह यादव और उसके बेटे विशाल ने उन्हें रोककर हमला कर दिया। पहले शांतनु पर वार कर उसे घायल किया, फिर विशाल ने अवैध 12 बोर की बंदूक से विजय सिंह के बाएं पैर में गोली मार दी। अधिक खून बहने से अस्पताल में उपचार के दौरान विजय सिंह की मौत हो गई। मृत विजय भाजपा जिला मंत्री वीर बहादुर सिंह के छोटे भाई थे। घटना में आरोपी और मृतक के बीच चाचा-भतीजे का रिश्ता सामने आया है। दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया है। परिवार का कहना है कि भतीजे ने चाची की मांग सूनी करी दी।

पहले भी हो चुकी है घटनाएं

नवंबर 2024, पनहैटीः वन भूमि पर कब्जे को लेकर आदिवासी और बंजारा समुदाय के बीच संघर्ष हुआ। दलसिंह भील की मौत के बाद हिंसा भड़की और बंजारा बस्ती के 30 से 35 घरों में आग लगा दी गई।

फरवरी 2025, ग्वारखेड़ाः वन भूमि पर खेती और अतिर मण के विवाद में दो पक्ष भिड़े। लाठी-डंडों से हमले में घायल भोगीराम लोधा की उपचार के दौरान मौत हो गई।

सितंबर 2025, चाकरीः वन भूमि विवाद सुलझाने के लिए बुलाई गई पंचायत में ही खूनी संघर्ष हो गया। तीर-कमान से हुए हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई।

अक्टूबर 2025, गणेशपुराः छह बीघा जमीन के पुराने विवाद में किसान परिवार पर हमला हुआ। रामस्वरूप नागर पर थार वाहन चढ़ाने का आरोप लगा। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

अक्टूबर 2026, सिरसीः जमीन और बटाईदारी के विवाद में मारपीट के बाद विनोद की मौत हुई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

तीन विभागों की जिम्मेदारी

बमोरी और फतेहगढ़ के वन क्षेत्रों में जमीन पर अधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहे हैं। बोवनी के समय ये और बढ़ जाते हैं। एक पक्ष वर्षों से खेती का दावा करता है तो दूसरा जमीन पर अपना अधिकार जताता है। घटनाओं के बीच वन, राजस्व और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विवाद होने पर पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करती है, लेकिन जमीन पर कब्जे का मूल विवाद जस का तस रह जाता है।