8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

असम में दिवाली पर केले के पौधों और बांस की बढ़ी मांग, किसानों-व्यापारियों के चेहरे खिले; जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा

Assam Diwali Tradition: असम में दिवाली की सदियों पुरानी परंपरा के चलते केले के पौधों और बांस की लकड़ियों की मांग बढ़ गई है। गुवाहाटी के बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है, जिससे किसानों और कारोबारियों को अच्छा कारोबार मिल रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

गुवाहाटी

•

image

Imran Ansari

•

Updated: 8 Nov 2026, 3:01 PM IST

Assam Diwali Tradition

असम में दिवाली पर केले के पौधों और बांस की बढ़ी मांग

Banana Plants Diwali: दिवाली के त्योहार के साथ ही असम के बाजारों में केले के पौधों, बांस की लकड़ियों, दीयों और पटाखों की मांग बढ़ गई है। राज्य में दिवाली मनाने की एक खास पारंपरिक प्रथा के चलते केले के पौधे और बांस की लकड़ियां लोगों के लिए त्योहार की तैयारियों का अहम हिस्सा बनी हुई हैं। इससे केले के किसानों और बांस कारोबारियों को भी अच्छी कमाई की उम्मीद है।

केले के पौधे और बांस से जुड़ी है खास परंपरा

असम में सदियों पुरानी परंपरा के तहत लोग दिवाली के दौरान घर के बाहर केले के पौधों पर मिट्टी के दीये रखते हैं। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर बांस की लकड़ियां भी लगाई जाती हैं। राज्य के कई हिस्सों में आज भी इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है। दिवाली से पहले गुवाहाटी के बाजारों में लोगों की भीड़ बढ़ गई है। लोग केले के पौधों, बांस की लकड़ियों, दीयों और पटाखों की खरीदारी कर रहे हैं। बाजारों में पहुंचने वाले केले के पौधे कामरूप, नलबाड़ी और मोरीगांव जैसे जिलों से लाए जा रहे हैं।

300 रुपये में खरीदे केले के पौधे

गुवाहाटी के गणेशगुड़ी इलाके के रहने वाले हेमेन बरुआ ने बताया कि उन्होंने 300 रुपये में केले के दो पौधे खरीदे हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग आसपास के पहाड़ी इलाकों से केले के पौधे खुद ले आते थे, लेकिन अब वहां केले के पौधे कम होने के कारण व्यापारी दूसरे जिलों से इन्हें शहर में लेकर आते हैं। हेमेन बरुआ ने बताया कि अब नलबाड़ी, बरपेटा और पाठशाला इलाके से केले के पौधे बाजारों में पहुंचाए जा रहे हैं।

व्यापारी ने की 5-6 हजार रुपये की बिक्री

केले के पौधे बेचने वाले व्यापारी चाणक्य डेका ने बताया कि वह कामरूप से केले के पौधे लेकर आए हैं। उनके मुताबिक, अब तक वह करीब 5 से 6 हजार रुपये के केले के पौधे बेच चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह दिवाली से एक रात पहले ही बाजार में केले के पौधे लेकर पहुंचे थे और त्योहार के चलते ग्राहकों की अच्छी मांग देखने को मिल रही है।

रंगोली, दीये और पटाखों की भी खरीदारी

गुवाहाटी की रहने वाली अद्रिता ने बताया कि वह घर पर दिवाली मनाने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने रंगोली के लिए रंग और दीये खरीद लिए हैं और अब पटाखे भी खरीदने की योजना है। वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी सूरज ने बताया कि उन्होंने दिवाली के लिए फूल और पटाखे खरीदे हैं। वह केले का पौधा भी खरीदना चाहते हैं, लेकिन त्योहार के दौरान इसकी कीमत उन्हें कुछ ज्यादा लग रही है।

किसानों और कारोबारियों को अच्छे कारोबार की उम्मीद

दिवाली के मौके पर केले के पौधों और बांस की बढ़ती मांग से असम के स्थानीय किसानों और व्यापारियों को फायदा हो रहा है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण इन चीजों की मांग हर साल त्योहार के समय बढ़ जाती है। असम के अन्य हिस्सों में भी लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं।