
आरएफ टैग लगे ट्रक, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Gwalior news: मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में अब खनिज से लदे ओवरलोड और बिना रॉयल्टी के चलने वाले ट्रकों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के जरिए नजर रखी जाएगी। इसके लिए विभाग को पहले चरण में 900 रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) टैग मिल चुके हैं। दो दिन के भीतर ट्रांसपोर्टरों ने सात टैग खरीद भी लिए है। विभाग जल्द ही सभी खनिज परिवहन वाहनों में ये टैग अनिवार्य करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है।यह सिस्टम नेशनल हाइवे पर लगे फास्टैग की तर्ज पर काम करेगा।
गिट्टी या पत्थर से भरा कोई डंपर जैसे ही बिलौआ या बिजौली स्थित ई-चेकगेट से गुजरेगा, वहां लगे ऑटोमेटेड सेंसर वाहन की विंडशील्ड पर लगे आरएफ टैग को स्कैन कर लेंगे। स्कैन होते ही वाहन का नंबर, स्वीकृत रॉयल्टी, खनिज का प्रकार और धर्मकांटे पर दर्ज वजन जैसी जानकारी सीधे विभाग के कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। अवैध परिवहन पाया जाता है, तो जुर्माने और कार्रवाई की प्रक्रिया की जाएगी। वाहन पर आरएफ टैग लगने के बाद उसकी पहचान दूसरे जिलों में भी की जा सकेगी। हाईकोर्ट के आदेश पर बिलौआ में चेकपोस्ट बनाया गया है। विभाग के अनुसार, चेकपोस्ट बनने से बिना रॉयल्टी ट्रकों की आवाजाही पर अंकुश लगा है और राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। खनिज की चोरी कर परिवहन करने वाले ट्रकों की आवाजाही कम होने से अब बिलौआ में प्रतिदिन 250 से 300 ट्रक ही पहुंच रहे है।
विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, आरएफ टैग का रखरखाव पूरी तरह वाहन स्वामी की जिम्मेदारी होगी। यदि कोई वाहन संचालक सेंसर से बचने के लिए टैग को निकालता है, निष्क्रिय करता है या क्षतिग्रस्त करता है, तो उस वाहन को तत्काल प्रभाव से खनिज परिवहन के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, ई-खनिज पोर्टल पर दर्ज वाहन का पंजीयन भी निरस्त किया जा सकता है। टैग खरीदने का पूरा खर्च वाहन मालिक को ही वहन करना होगा।
आरएफ टैग लए अभियान चलाया जाएगा। खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों में इसे अनिवार्य किया गया है। एक महीने के भीतर जो वाहन मालिक टैग नहीं लगवाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- पंकजध्वज मिश्रा, जिला खनिज अधिकारी
Updated on:
20 Oct 2026 09:46 am
Published on:
20 Oct 2026 09:46 am
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