आयोग ने आदेश में स्पष्ट किया कि इलाज की पद्धति क्या होगी और मरीज को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता है या नहीं, यह उपचार करने वाले चिकित्सक के विवेक का विषय है, बीमा कंपनी का नहीं। आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा एवं सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी को आदेश दिया कि वह पॉलिसी की शेष क्लेम राशि 15,721 के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति के 2,000 और वाद व्यय के 1,000, कुल 18,721 परिवादी को 45 दिन के भीतर अदा करे। तय समयावधि में भुगतान न करने पर कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा।