
ऑक्यूपेशनल थेरेपी मरीजों को चोट या बीमारी के बाद रोजमर्रा के काम दोबारा खुद से करने के काबिल बनाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
World Occupational Therapy Day 2026: कप के हैंडल को सही से न पकड़ पाना, शर्ट के बटन बंद करने में उंगलियों का कांपना, चोट के बाद खुद नहाने या खाना खाने में झिझक होना, या बच्चे का पेंसिल पकड़ने में संघर्ष करना ये वो शुरुआती संकेत हैं जो दिखाते हैं कि शरीर को सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में लौटने के लिए सही मार्गदर्शन की जरूरत है। अक्सर जब चोट, सर्जरी, स्ट्रोक या बढ़ती उम्र के कारण शरीर का कोई हिस्सा ठीक से काम करना बंद कर देता है, तो दिमाग में सबसे पहला नाम फिजियोथेरेपी का आता है। लेकिन जब बात खुद से कपड़े पहनने, चम्मच संभालने, गाड़ी चलाने या ऑफिस के लैपटॉप पर काम करने की आती है, तो वहां असली भूमिका ऑक्यूपेशनल थेरेपी की होती है। विश्व व्यावसायिक चिकित्सक संघ (World Federation of Occupational Therapists - WFOT) के अनुसार, वर्ल्ड ऑक्यूपेशनल थेरेपी डे 27 अक्टूबर को मनाया जाता है। आइए आज इस मौके पर जानते हैं कि फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी में क्या फर्क है और किस स्थिति में किसकी जरूरत पड़ती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, ऑक्यूपेशनल थेरेपी (OT) का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह सिर्फ नौकरी से जुड़ी है। चिकित्सा विज्ञान में 'ऑक्यूपेशन' का मतलब उन सभी गतिविधियों से है जो आप सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक करते हैं। यह थेरेपी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों से उबारकर आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान केंद्रित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य मरीज को इस काबिल बनाना है कि वह बिना किसी की मदद के अपने दैनिक कार्य आसानी से कर सके।
दोनों ही थेरेपी मरीज के सुधार के लिए एक साथ काम करती हैं, लेकिन दोनों का फोकस पूरी तरह से अलग होता है। फिजियोथेरेपी (PT) का ध्यान शरीर की गतिशीलता (Mobility), मांसपेशियों की ताकत, दर्द से राहत, जोड़ों की लचीलापन और संतुलन में सुधार करने पर होता है। वहीं दूसरी तरफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (OT) का ध्यान इस बात पर होता है कि मरीज अपनी उस शारीरिक क्षमता का इस्तेमाल करके रोजमर्रा के काम (जैसे नहाना, खाना, लिखना, कपड़े पहनना) किस तरह स्वतंत्रतापूर्वक कर सकता है। फिजियोथेरेपिस्ट, कसरत, स्ट्रेचिंग, मसाज और इलेक्ट्रोथेरेपी की मदद से प्रभावित हिस्से का इलाज करते हैं। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, मरीज को सहायक उपकरणों (जैसे व्हीलचेयर, ग्रिपर, स्पेशल स्पून) का इस्तेमाल सिखाते हैं और मरीज के घर या वर्कप्लेस के माहौल को उसकी सुविधा के अनुसार ढालने में मदद करते हैं।
फिजियोथेरेपी
ऑक्यूपेशनल थेरेपी के फायदे
अगर कोई मरीज घुटने के ऑपरेशन के बाद चलने की कोशिश कर रहा है, तो उसे फिजियोथेरेपी की जरूरत है। लेकिन अगर वह चलने के बाद खुद टॉयलेट का इस्तेमाल करने या रसोई में चाय बनाने में असमर्थ महसूस कर रहा है, तो वहां ऑक्यूपेशनल थेरेपी की आवश्यकता होती है।
Updated on:
27 Oct 2026, 7:53 AM IST
Published on:
27 Oct 2026, 7:51 AM IST
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