
बार-बार जेब में फोन न होने पर भी कंपन महसूस होना 'फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम' का संकेत हो सकता है, जो अत्यधिक डिजिटल इस्तेमाल और मानसिक थकान के कारण होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Phantom Vibration Syndrome: कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी जरूरी काम में व्यस्त हों और अचानक आपको अपनी जेब में या हाथ में रखे फोन के वाइब्रेट होने का अहसास हो? आप तुरंत फोन निकालकर देखते हैं, लेकिन स्क्रीन बिल्कुल शांत होती है ना कोई नोटिफिकेशन, ना कोई कॉल और ना ही कोई मैसेज। अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो यह सिर्फ एक भ्रम नहीं, बल्कि एक मेडिकल और मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम (Phantom Vibration Syndrome) कहा जाता है। आज के समय में यह समस्या इतनी आम हो गई है कि हर दूसरा स्मार्टफोन यूजर कभी न कभी इसका शिकार होता है। आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और क्या यह हमारी मानसिक सेहत के लिए खतरे की घंटी है।
डर्मनेट के अनुसार, यह हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम का एक तरह का धोखा है। जब हम लगातार हर वक्त फोन अपने पास, जेब में या हाथ में रखते हैं, तो हमारा दिमाग और त्वचा उसकी आदत डाल लेते हैं। इसे टैक्टाइल हेलुसिनेशन (Tactile Hallucination) या संवेदी भ्रम कहा जाता है। इसमें असल में फोन वाइब्रेट नहीं हो रहा होता, लेकिन हमारा नर्वस सिस्टम किसी दूसरी सनसनी जैसे कपड़ों की रगड़, मांसपेशियों का हल्का सा फड़कना या दिल की धड़कन को फोन के वाइब्रेशन के रूप में समझ बैठता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, जब हम हद से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो हमारा दिमाग हमेशा एक हाई अलर्ट मोड पर रहता है। हम अंदर से इस बात को लेकर हमेशा थोड़े आशंकित या उत्सुक रहते हैं कि कहीं किसी का मैसेज या जरूरी कॉल तो नहीं आ गया। नतीजा यह होता है कि दिमाग का सेंसरी कॉर्टेक्स (Sensory Cortex) बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। वह जरा सी भी हलचल को फोन की घंटी या कंपन समझकर तुरंत रिएक्ट कर देता है। जो लोग ऑफिस के काम, सोशल मीडिया या बिजनेस चैट्स से लगातार जुड़े रहते हैं, उनका नर्वस सिस्टम इस तरह के झूठे सिग्नल बहुत जल्दी कैच करता है।
शुरुआत में यह सिर्फ एक अजीब सी आदत या भ्रम लग सकता है, लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा होने लगे तो यह कुछ बातों का संकेत देता है;
यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि जीवनशैली में थोड़े से बदलाव करके इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है;
तकनीक हमारी सुविधा के लिए है, लेकिन जब वह हमारे शरीर और दिमाग पर हावी होने लगे, तो एक ब्रेक लेना जरूरी है। अगली बार जब जेब में ऐसा कंपन महसूस हो और फोन खाली मिले, तो समझ जाइए कि आपका दिमाग थोड़ा आराम मांग रहा है।
Published on:
4 Nov 2026, 6:00 AM IST
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