
ओवैसी ने INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से बनाई दूरी, फोटो सोर्स- ANI
INDIA Block Protest : AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की अपनी मांग दोहराई है। उन्होंने मौजूदा चयन प्रक्रिया को कार्यपालिका के पक्ष में बताते हुए इसमें बदलाव की जरूरत बताई। ओवैसी ने कहा कि CEC के चयन की प्रक्रिया में सुधार करना सबसे जरूरी मुद्दों में से एक है।
हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दिल्ली में INDIA ब्लॉक के उस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध किया गया। उन्होंने कहा कि AIMIM INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।
ओवैसी ने कहा कि मैं वहां नहीं गया क्योंकि मैं उस गठबंधन का हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम? उन्होंने कहा कि CEC के चयन की मौजूदा प्रक्रिया गलत है और इसमें कार्यपालिका का प्रभाव अधिक है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में बदलाव होना चाहिए।
ओवैसी ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI को चयन पैनल में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में CJI को चयन समिति से बाहर रखा गया है और इसे बदला जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री चयन समिति के अध्यक्ष होते हैं। समिति में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी शामिल होते हैं।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी ओवैसी ने अपना विरोध दोहराया। उन्होंने इसे "बैकडोर से NRC" बताते हुए कहा कि उन्होंने बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान भी इसका विरोध किया था। ओवैसी ने कहा कि SIR को लेकर उनकी आपत्तियां पहले भी सामने आती रही हैं और वह इस प्रक्रिया को गलत मानते हैं।
CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में CJI को चयन पैनल से हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। पिछले महीने इस मुद्दे पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में मतभेद सामने आया था।
जस्टिस दत्ता ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग को खारिज किया था, जबकि जस्टिस शर्मा ने इसे संविधान पीठ के समक्ष विचार योग्य माना था। हालांकि, दोनों न्यायाधीशों ने इस बात पर सहमति जताई कि मामले को उचित संख्या वाली संविधान पीठ के गठन पर विचार के लिए CJI के समक्ष रखा जाए।
Updated on:
06 Oct 2026 06:40 pm
Published on:
06 Oct 2026 06:40 pm
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