
Drug Smuggling
जानकारी के मुताबिक, नेशनल इंटीग्रेटेड डेटाबेस नार्को रिपीट ऑफेंडर्स (निदान पोर्टल) के हिसाब से पिछले 2 वर्ष में बाहर से शहर में आने वाले 498 अपराधी पकड़े गए हैं। इंदौर पुलिस के 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, नशे की तस्करी करने वाले 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 2023 में पुलिस ने 260 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है।
शहर में रोज 6000 से ज्यादा लोग ले रहे स्मैक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इंदौर में नशा सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। जांच और थानों की डिटेल से पता चला है कि शहर में रोजाना 6 हजार से ज्यादा लोग करीब 600 ग्राम स्मैक का नशा कर रहे हैं। हालांकि शहर में नशे की सह्रश्वलाइ डिमांड अनुसार बढ़ती जा रही है। इसके लिए पुलिस के साथ जनता को भी मिलकर प्रयास करना होंगे।
इन रास्तों से आ रही तरह-तरह की ड्रग्स
इंदौर शहर में नशे की सह्रश्वलाई की चेन इंदौर पुलिस ने खंगालना शुरू कर दी है। डीसीपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक, पुलिस गिरफ्त में आए नशा तस्करों से शहर में आने वाले नशे का रोड मैप तैयार किया गया है।
गांजा : ओडिशा से निकलकर रायपुर और भोपाल के बाद सेंट्रल मालवा रीजन में यह मादक पदार्थ पहुंच रहा है।
एमडी ड्रग्स : मुंबई से इंदौर आ रही है। नोएडा, दिल्ली के तस्करों ने भी इंदौर का रुख कर लिया है।
ब्राउन शुगर और हेरोइन: राजस्थान से मंदसौर होते हुए उज्जैन के रास्ते इंदौर पहुंच रही है।
चरस : बिहार से होते हुए देवास के रास्ते इंदौर पहुंच रही है।
अब तक 16 आरोपियों को रिहैब सेंटर भेजा
डीसीपी मिश्रा ने युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए नवाचार किया है। वह एडीपीएस एक्ट के अपराधियों को इस शर्त पर बेल देते हैं कि उन्हें रिहैब सेंटर में भर्ती किया जाएगा। अब तक मिश्रा 16 लोगों को रिहैब सेंटर भेज चुके हैं। नशे की लत में डूबे गरीब तबके के युवाओं को नशा मुक्ति केंद्र में जाने के लिए 25 से 30 हजार रुपए प्रवेश शुल्क देना होता है। इसके अलावा 20 हजार रुपए केवल 3 महीने का शुल्क लगता है। हालांकि, शहर में कुछ सरकारी रिहैब सेंटर मुफ्त में नशा छुड़वाते हैं।
पार्टी कल्चर पर नजर जरूरी
इंदौर में पिछले दस वर्ष में नशा करने वालों और इसके कारोबार में इजाफा हुआ है। हमारे पास अब पहले से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इंदौर में हॉस्टल सहित अकेले रहने वाले युवाओं की संख्या लाखों में है। ऐसे में इनमें से कई गलत संगत में पड़ जाते हैं। मध्यम व उच्च वर्ग के कई युवा महंगे नशे के आदी हो रहे हैं। इंदौर में ब्राउन शुगर का नशा करने वाले युवा भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जो बेहद ही चिंताजनक स्थिति है, इसलिए पार्टी कल्चर पर नजर रखनी बेहद जरूरी है। प्रशासन को बस्ती, कस्बे से लेकर पॉश एरिया तक में कठोर निगरानी रखनी होगी, ताकि इसे बेचने वाले भी गिरफ्त में आ सके। - डॉ. रामगुलाम राजदान, पूर्व डीन शासकीय मानसिक रोग चिकित्सालय बाणगंगा
Published on:
19 Feb 2024 08:17 am
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