
इंदौर। डॉक्टर दादी के नाम से चर्चित डा. भक्ति यादव इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी आज भी प्रेरणा देती है।
mothers day: मिलिए एक ऐसी मां से, जिन्होंने डेढ़ लाख बच्चों को जीवन दिया। गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (guinness book of world records) में भी सबसे अधिक डिलिवरी कराने का रिकॉर्ड भी इन्हीं के नाम पर है। पद्मश्री डॉ. भक्ति यादव (dr bhakti yadav) ऐसी मां थीं, जिन्हें लोग 'डॉक्टर दादी' कहते थे। 91 वर्ष के अंतिम दिनों तक ममतामयी मां दूसरों को जीवन देने में जुटी रही।
मदर्स डे पर patrika.com पर पेश है डॉक्टर दादी से जुड़ी कहानी...।
घर पर जाकर दिया पद्मश्री
इंदौर की पहली महिला एमबीबीएस डॉक्टर (mbbs) रही भक्ति यादव को 30 मार्च 2017 को पद्मश्री अवॉर्ड देने की घोषणा हुई थी। यह सम्मान राष्ट्रपति की ओर से एक सम्मान समारोह में बांटे गए थे, लेकिन अधिक उम्र होने के कारण डाक्टर दादी यह सम्मान लेने नहीं जा पाई। इसके बाद कलेक्टर और प्रभारी मंत्री खुद उनके घर गए और पद्मश्री से नवाजा गया। आज इस ममतामयी मां को मदर्स डे (Mother’s Day 2021) पर इंदौर के लोग इसलिए भी याद करते हैं कि इंदौर के ज्यादातर घरों में एक न एक बच्चे का जन्म डाक्टर दादी के अस्पताल में हुआ है।
सिर्फ एक रुपया लेती थीं फीस
डॉ. भक्ति अपने जीवन के अंतिम पड़ाव तक मरीजों की सेवा में जुटी रहती थीं। अपने पूरे जीवनकाल में डाक्टर दादी के नाम पर डेढ़ लाख से ज्यादा महिलाओं की डिलिवरी करवाने का रिकार्ड है। उन्होंने 1948 से करियर शुरू किया और दो साल पहले तक वे इसी काम में जुटी रही। एक गायनेकोलॉजिस्ट होने के बावजूद वे किसी भी महिला की डिलिवरी कराने के लिए महज एक रुपया फीस लेती थीं।
पीएम मोदी भी हुए थे दुखी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) ने भी 14 अगस्त 2017 को डाक्टर दादी के निधन पर दुख जताते हुए कहा था कि भक्ति यादव का दुनिया से चले जाना दुखद है। उनका काम हम सबके लिए एक प्रेरणा है।
आधे मरीज तो ऐसे ही हो जाते थे ठीक
डाक्टर दादी (dr bhakti yadav indore ) हर किसी मरीज से मुस्कुराते हुए और अपने परिवार के सदस्य की तरह बात करती थी। उनके बारे में कहा जाता था कि वे किसी मरीज के पास ही पहुंच जाती थी तो वो आधा तो ऐसे ही ठीक हो जाता था।
एक नजर
Updated on:
09 May 2021 11:09 am
Published on:
08 May 2021 06:39 pm
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