
सड़क चौड़ीकरण, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Indore news:मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में होने वाले सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण में जाने वाली जमीन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इसमें नगर निगम के सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण हटाने व जमीन निगम की घोषित करने को चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर उज्जैन नगर निगम व सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में निगम कार्रवाई पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन अंतरिम व्यवस्था दी कि जो भी कार्रवाई होगी, वो कोर्ट आदेश के अधीन रहेगी। चौबीस खंभा मार्ग उज्जैन निवासी छात्र सोमिल कराड़े ने निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण को लेकर जारी आदेश को चुनौती दी है।
उनका कहना है कि केंद्र सरकार 13 साल पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद राज्य सरकार के मप्र म्यूनिसिपल एक्ट की धारा-305 का औचित्य नहीं रह जाता। इसके तहत निगम को सड़क बनाने में बाधक निर्माण हटाने के साथ ही उस जमीन का आधिपत्य मिल जाता है। भूमि अधिग्रहण कानून में इसके लिए दावे आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया है, जबकि निगम एक्ट में केवल नोटिस के जरिए ही प्रक्रिया पूरी हो जाती ऐसे में दो नियम एक दूसरे के विपरीत होने के चलते उन्होंने याचिका दायर की है। है। कोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि अगला उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ मेला) 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने सवाल उठाए कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे केस में इस विषय को तय कर चुकी है तो फिर कोर्ट इस पर कैसे सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सुभदावाघमारे द्वारा जब कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, उस समय केंद्र सरकार का कानून लागू नहीं हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही चार सप्ताह का निर्णय लिया है। बाद इस पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है।
Updated on:
07 Oct 2026 07:57 am
Published on:
07 Oct 2026 07:57 am
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