
बाइक टैक्सी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Indore news: मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों की सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक, पार्किंग की समस्या और छोटी दूरी के लिए कैब-ऑटो का अपेक्षाकृत ज्यादा किराया अब बाइक टैक्सी को अलग विकल्प बना रहा है। केंद्र की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 राज्यों को गैर-परिवहन यानी निजी बाइकों को एग्रीगेटर के जरिए यात्री सेवा में लगाने की अनुमति देती है। इसे लागू करने की तैयारी परिवहन विभाग कर रहा है। पॉलिसी राज्य शासन को भेजी जा चुकी है। इंदौर में भी कंपनियों ने लाइसेंस लेना शुरू कर दिए हैं। सितंबर में इंदौर में हुए यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में मप्र यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रैपिडो के बीच एमओयू हुआ है। इससे फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए बाइक टैक्सी की भूमिका बढ़ने के संकेत है।
मालूम हो इंदौर में तीन बड़ी कंपनियां बाइक टैक्सी सेवा दे रही है। हालांकि ये हजारों बाइक नियम विरुद्ध गैर व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन पर चल रही है। करीब 200 बाइक ही इंदौर आरटीओ में व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन की श्रेणी में है। नियम विरुद्ध चलने वाली बाइक को नियम के दायरे में लाया जा रहा है। 2 सितंबर 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों से घरेलू श्रेणी की बाइक टैक्सी को अनुमति देने की अपील की थी। केंद्र की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन के तहत पॉलिसी पर मप्र ने काम भी शुरू कर दिया है। आरटीओ प्रदीप शर्मा ने बताया, बाइक टैक्सी आम जनता और ट्रैफिक के लिहाज से महत्वपूर्ण है। शहर में
बाइक टैक्सी के लिए एक कंपनी ने लाइसेंस ले लिया है, बाकी प्रक्रिया चल रही है।
11 सितंबर को इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में शुरू हुए दो दिनी यात्री परिवहन विजन समिट में सरकार और रैपिडो के बीच एमओयू हुआ। इसका फोकस सार्वजनिक परिवहन की फर्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करना हैं। इसके तहत महिलाओं के लिए संचालित 'रैपिडो पिंक' बाइक टैक्सी जैसी पहल की संभावनाएं भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में पायलट स्तर पर सेवा की दिशा में काम किया जाना है।
अकेले यात्री की छोटी दूरी की सवारी का एक हिस्सा ऑटो और कैब से बाइक टैक्सी की ओर जा सकता है। इससे ऑटो चालकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जबकि यात्रियों को कम किराए और ज्यादा विकल्प का फायदा मिलेगा। परिवार, बुजुर्ग, सामान लेकर चलने वाले यात्री या लंबी दूरी की यात्रा में ऑटो-कैब की उपयोगिता बनी रहेगी, यानी मुकाबला खत्म करने का नहीं, विकल्प बढ़ाने का है।
विजय नगर, भंवरकुआं, पलासिया, एमआर-10, रिंग रोड आदि पर पीक ऑवर में वाहनों का दबाव बढ़ता है। बाइक टैक्सी का आकार छोटा होने से यह कार की तुलना में कम सड़क घेरती है और जाम वाले हिस्सों से निकलने में सक्षम होती है। केंद्र की 2025 गाइडलाइन में भी गैर-परिवहन बाइकों को एग्रीगेटर से अनुमति देने के पीछे ट्रैफिक जाम, प्रदूषण कम करने तथा किफायती यात्री परिवहन उपलब्ध कराने का उल्लेख है।
Updated on:
06 Oct 2026 09:40 am
Published on:
06 Oct 2026 09:40 am
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