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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के पूर्व विशेष कर्तव्स्थ अधिकारी एवं रिटायर्ड एडीजे आरके श्रीवास एक बार फिर चर्चा में हैं। इससे पहले उन्होंने कोर्ट की व्यवस्था के खिलाफ हाइकोर्ट तक साइकिल यात्रा की थी। जबलपुर पहुंचकर कोर्ट के समक्ष धरने पर बैठे थे। लेकिन इस चर्चा उनके द्वारा मंगलवार को हाइकोर्ट में दायर किए गए परिवाद को लेकर है। श्रीवास ने इस बार जबलपुर जिला अदालत में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल फहीम अनवर, पूर्व जबलपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश केके त्रिपाठी व हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार ( पीआर ) सत्येंद्र सिंह के खिलाफ परिवाद दायर किया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बलराज सिंह क ी अदालत ने मामले पर २९ मई को सुनवाई नियत की है।
यह है मामला
श्रीवास की ओर से अधिवक्ता प्रमेंद्र सेन ने बताया कि रजिस्ट्रार जनरल फहीम अनवर के खिलाफ भादंवि की धारा 500 एवं पूर्व डीजे त्रिपाठी व पीआर सिंह के खिलाफ धारा 500, 120 बी, 193 के तहत परिवाद दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि 20 फरवरी 2017 को तत्कालीन डीजे त्रिपाठी व अन्य न्यायाधीशों की उपस्थिति में उन्हें न्यायालयीन समस्याआें के निराकरण के नाम पर बुलाया गया। वहां अच्छे माहौल में चर्चा हुई। इसके बावजूद पीआर सिंह ने उनके खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों संे असंयत भाषावली का प्रयोग किया। इसके अलावा 11 जनवरी, 2018 को बिना किसी साक्ष्य के उक्त जांच खत्म कर दी गई।
साजिश, प्रतिष्ठा और कदाचरण
परिवाद में कहा गया कि उन्होंने इसके खिलाफ आवेदन भी दिया, लेकिन साजिश के तहत इसे नामंजूर कर दिया गया। अधिवक्ता सेन ने तर्क दिया कि इससे परिवादी की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई। साजिश के तहत की गई इस मानहानि की वजह से ही उन्हें 19 अप्रैल को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। कहा गया है कि रजिस्ट्रार जनरल फहीम अनवर ने परिवादी पर कदाचरण का झूठा आरोप लगाया। इसके चलते भी उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई। कोर्ट ने परिवाद का पंजीकृत कर लिया।
Published on:
25 Apr 2018, 7:30 AM IST
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