
सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली जयपुर जिले की बस्सी अनाज मंडी सरकारी लापरवाही के कारण जिंस के लिए जूझ रही है। जहां प्रतिवर्ष सीजन में दस हजार बोरियां मंडी में किसान लेकर आते थे वहां इस वर्ष घटकर एक हजार से पंद्रह सौ बोरियां रह गई हैं। मार्च में जब सीजन चरम पर रहता था तो यहां राजस्व की बढ़ोतरी बहुत ज्यादा होती थी। इस बार राजस्व घटकर तीन से चार लाख रुपए घट गया है। व्यापारियों का कहना है कि बस्सी क्षेत्र में जो स्टेट हाईवे व अन्य संपर्क सड़कें हैं उन पर सड़कें बिल्कुल टूट चुकी हैं या उन पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं जिस पर यहां आने वाले किसान मंडी में माल तो लाना चाहते हैं लेकिन वाहन चालक बस्सी मंडी में माल लाने से कतराते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण वाहन चालक सड़कों के खराब होने का हवाला दे रहे हैं। जिस कारण व्यापारी माल के लिए तरस रहे हैं तो मंडी राजस्व के लिए तरह रही है। मंडी प्रशासन सूत्रों ने बताया कि चना, सरसों की बंपर आवक के बाद भी मंडी में बहुत कम जिंस बिकने आई है। वहीं सरकार द्वारा घोषणा के बाद सरकारी समर्थन मूल्य को भी देखते हुए जिंस नहीं ला रहे हैं।
आठ से दस हजार बोरियां आती थी प्रतिदिन
मंडी के व्यापारियों ने बताया कि पिछले वर्षों मंडी में प्रतिदिन आठ से दस हजार बोरियां बिकने आती थी लेकिन अब एक हजार से पंद्रह सौ बोरियां ही बिकने आ रही हैं। बस्सी मंडी में चना व सरसों की जिंस कम मात्रा में आ रही है वहीं जौ व गेहूं भी पिछले वर्ष की तुलना मे कम मात्रा में आ रहे हैं जिसके कारण व्यापारियों के क्रय-विक्रय पर तो फ र्क पड़ा है और मंडी के राजस्व पर भी बहुत असर पड़ा है।
उपखंड में ज्यादातर सड़कें क्षतिग्रस्त
व्यापारियों ने बताया कि उपखंड क्षेत्र की कई सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां के वाहन मालिक इन सड़कों पर किसानों का माल मड़ी में लाने से परहेज कर रहे हैं। व्यापारियों ने बताया कि बस्सी क्षेत्र के साथ लालसोट क्षेत्र की जिंस भी यहां आती थी बस्सी क्षेत्र की कई सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण किसानों की जिंस वाहनों के कारण मंडी में नहीं पहुंच रही है।
पल्लेदार हो रहे हैं परेशान
व्यापारी विनय कुमार डंगायच ने बताया कि इस बार माल की आवक कम होने के कारण पल्लेदारों की भी मजदूरी नहीं निकल पा रही है। पल्लेदार दूरदराज से मजदूरी के लिए आते हैं जिनकी मजदूरी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं निकल रही है।
गत वर्ष दस हजार बोरियों की आवक थी। इस वर्ष घटकर एक हजार से पंद्रह सौ बोरियों की आवक रह गई जिससे मंडी के राजस्व में कमी हो गई है। - कल्याण सहाय बिनोलियां, कनिष्ठ लिपिक, कृषि मंडी बस्सी
बस्सी अनाज मंडी में जिंस की आवक कम होने के कारण इस बार खरीद कम हो रही है जिसके कारण मंडी में राजस्व भी कम हो रहा है। - विनय कुमार डंगायच, व्यापार मंडल अध्यक्ष व पंचायत समिति सदस्य
चने व सरसों की सरकारी खरीद भी मंडी में कम आवक आने का कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मंडी में जिंस कम आ रही है। - सूरज नारायण शर्मा, अध्यक्ष, कृषि उपज अनाज मंडी बस्सी
Published on:
16 Apr 2018, 1:02 PM IST
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