कोर्ट ने कहा...
यह सुस्थापित सिद्धांत है कि जिसकी प्रतिष्ठा की हानि हुई, वह व्यक्ति ही परिवाद दायर कर सकता है। इस मामले में परिवादी खुद व्यथित नहीं है। इसके अलावा परिवाद में आईपीसी की धारा 504 के तहत आरोप लगाए हैं, जबकि परिवाद में इससे संबंधित किसी तथ्य का उल्लेख ही नहीं है।