
जयपुर में कांग्रेस क्यों हारी नगर निगम बोर्ड? जानिए (पत्रिका फाइल फोटो)
जयपुर: नगर निगम चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर कलह खुलकर सामने आ गई है। सोमवार को आयोजित कांग्रेस के बड़े प्रदर्शन से पार्टी के कई नाराज नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों ने दूरी बनाए रखी। इन नेताओं का कहना है कि वे कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन जयपुर शहर के नेतृत्व से बेहद नाखुश हैं। उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने चुनाव के दौरान नाराज कार्यकर्ताओं और बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।
जयपुर शहर के पूर्व महामंत्री मित्रोदय गांधी ने कहा कि हवामहल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार 26 हजार और आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में 22 हजार वोट ले उड़े। उनका कहना है कि यदि इन बागियों को समय रहते बैठा लिया जाता, तो चुनाव परिणाम कुछ और हो सकते थे।
नाराज गुट के नेताओं का आरोप है कि शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा और दोनों स्थानीय विधायकों रफीक खान व अमीन कागजी ने नाराज कार्यकर्ताओं और बागियों को मनाने का कोई प्रयास नहीं किया। नेताओं का कहना है कि इसी वजह से जयपुर में कांग्रेस भाजपा से पीछे रह गई। इन नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सिफारिश पर चुनाव मैदान में उतारे गए कई उम्मीदवार बुरी तरह हार गए।
नाराज कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर मंत्री तक सक्रिय रहे। उनके मुताबिक भाजपा नेताओं ने रोड शो किए और अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की, जबकि कांग्रेस में ऐसी कोई कोशिश नजर नहीं आई।
नाराज नेताओं ने अपनी बात के समर्थन में वार्ड 134 और वार्ड 133 का उदाहरण दिया। वार्ड 134 में कांग्रेस प्रत्याशी यशपाल गुर्जर महज 137 वोटों से चुनाव हार गए। यहां निर्दलीय प्रत्याशी को मिले वोटों ने हार के अंतर पर बड़ा असर डाला।
इसी तरह वार्ड 133 में कांग्रेस की गुड्डी देवी करीब 600 वोटों से चुनाव हारीं। इस वार्ड में कांग्रेस से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी को मिले वोट हार के अंतर से भी अधिक रहे।
चुनाव के बाद बोर्ड बनाने की स्थिति में कांग्रेस के साथ आए निर्दलीयों में से पांच निर्दलीय पार्षद अलग घूमते रहे। इन निर्दलीय पार्षदों का आरोप है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता उन्हें साथ लाने या मनाने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं कर पाए।
चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर सामने आई यह नाराजगी अब पार्टी के शहर नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर रही है। नाराज नेताओं का कहना है कि वे कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन शहर नेतृत्व से उनकी नाराजगी बनी हुई है।
Updated on:
29 Sept 2026 08:00 am
Published on:
29 Sept 2026 08:00 am
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