
Court : फाइल फोटो
जयपुर। राजधानी में निर्धारित क्षेत्रों के बाहर संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से तलब कर अब तक की कार्रवाई की जानकारी मांगी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्रवाई में कथित ढिलाई पर भी सवाल उठाए। राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व में जयपुर में ऐसे कॉमर्शियल इलाकों में कोचिंग सेंटर संचालित किए जाने का मामला सामने आया था, जहां संचालन की अनुमति नहीं थी। इन संस्थानों को सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से कोचिंग संस्थानों के लिए निर्धारित क्षेत्रों में शिफ्ट किया जाना था। मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आने के बाद जेडीए ने संबंधित कोचिंग सेंटरों को निर्धारित क्षेत्रों में स्थानांतरित होने के नोटिस भी जारी किए थे।
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीप रस्तोगी कोर्ट के अधिकारी के तौर पर उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि एक दिन मेरे मोबाइल पर चार मिस्ड कॉल आई। मेरे साथ मौजूद एक वेलफेयर सोसायटी के सचिव ने फोन रिसीव किया तो कॉल करने वाले ने कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। 12 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज की गई, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी है।
धमकी की जानकारी सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के अधिकारी या कोर्ट की सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना किसी डर या आशंका के अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम होना चाहिए। कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव और DGP को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर मामले की ताजा स्थिति बताने और कथित पुलिस लापरवाही की वजह स्पष्ट करने को कहा।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से डीजीपी से निर्देश लेने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि धमकी और संबंधित मामले में 24 घंटे के भीतर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इस मामले में राजस्थान पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की नजर रहेगी। जयपुर के कोचिंग सेंटरों का मामला सुप्रीम कोर्ट की अवैध निर्माण और भूमि उपयोग को लेकर चल रही व्यापक निगरानी के बीच सामने आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों का उपयोग केवल आवासीय गतिविधियों के लिए निर्धारित है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं। ऐसी गतिविधियां पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहले चरण में सील करने की कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भवन या जमीन के इस्तेमाल को लेकर मुकदमा लंबित होने मात्र से कार्रवाई नहीं रोकी जा सकती है। उसका उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत पाया जाता है। बिना मंजूरी के बने ढांचे के मामले में कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई में किसी तरह का पिक एंड चूज रवैया नहीं होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में बिना भेदभाव कार्रवाई की जानी चाहिए।
Updated on:
26 Sept 2026 08:11 pm
Published on:
26 Sept 2026 08:11 pm
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