28 सितंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

साहब इन बंदरों से बचाएं: बेखौफ सड़कों पर इंसानों की तरह हो जाते हैं खड़े, हर दिन 3 लोगों पर हमला, लोग घरों में ‘कैद’

बंदरों ने आमजन को कमरों में कैद कर के रख दिया हैं।जिस मकान में मात्र एक या दो व्यक्ति हैं। ये इनको धता बताते हुए उस घर में ये दिन में ही नही रात में भी अपना डेरा जमा लेते है और मौका मिलते ही सामान पार कर ले जाते हैं।
3 min read
Google source verification
monkey_attack.jpg

राजस्थान के मनोहरपुर कस्बे में इन दिनों बंदरों ने आमजन को कमरों में कैद कर के रख दिया हैं। जिस मकान में मात्र एक या दो व्यक्ति हैं। ये इनको धता बताते हुए उस घर में ये दिन में ही नही रात में भी अपना डेरा जमा लेते है और मौका मिलते ही सामान पार कर ले जाते हैं। वर्तमान में पतंगबाजी के शौकीन अपनी पतंग को लेकर जैसे ही उसे ऊपर चढ़ाते हैं। इन बंदरों की टोली को देखकर दहशत में आ जाते हैं जिसके चलते कई बच्चे छत से गिरकर चोटिल हो चुके हैं।

इनके आतंक से त्रस्त लोग छतों पर जाने से भी कतराने लगे हैं। हालांकि नगरपालिका प्रशासन ने जनवरी माह में बंदर पकड़वाए थे। किंतु ठेकेदार ने कुछ जगहों से बंदर पकड़े। इसके बाद उसने बंदर पकड़ना बंद कर। दिया। अब कस्बे के सभी मोहल्लेबासी इनके आतंक के साए में जी रहे हैं। इनसे परेशान आमजन नगर पालिका प्रशासन से बार-बार इन बंदरों से पकड़वाने की लगातार मांग कर रहा है। किंतु अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया हैं।

निरंतर कस्बे में बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। सरकारी चिकित्सालय से प्राप्त आंकड़ों पर नजर डालें तो जानकारी मिलती है कि अमूमन प्रतिदिन दो से तीन मरीजों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार रावधीर सिंह कॉलोनी, सब्जी मंडी, इंद्रा कॉलोनी, गांधी चौक , वामनदेव जी महल्ला, पंचमुखी हनुमान कॉलोनी, जुगल जी मोहल्ला, बाबा साहब का बाजार, छीपा मोहल्ला, मेडवालों का मोहल्ला, शिव कॉलोनी, बंगाली मोहल्ला , बस स्टैंड, कुमावतों का मोहल्ला में इनका ज्यादा आतंक रहता है। कस्बे के प्रत्येक गली मोहल्ले में इन बंदरों की अलग-अलग करीब 20 से 25 टोलियां है । प्रत्येक टोली में करीब 15 से 40 बंदर है। ये बंदर अब इंसानों की तरह ही रास्ते को रोककर खड़े हो जाते हैं। इससे इस रास्तों व गलियों से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। जिस टोली में छोटे बंदर ज्यादा है। उनको भगाने पर वह जोर जोर से चीखने लगता हैं।

ऐसे में वहां उनको बचाने के लिए अन्य बड़े बंदर गुस्से में होकर बड़े ही खतरनाक तरीके से हमला करते है। फ्रीज को खोलकर फल, सब्जी सहित अन्य खाने के सामान को लेकर चले जाते हैं। कई बार चावल, दाल, चीनी जैसे सामान को फैला जाते हैं। बंदरों के डर से गलियों में, छतों पर बच्चे नहीं खेलते हैं। छतों पर बैठकर धूप सेकना व कपडा सुखाना भी अब कठिन कार्य प्रतीत हो रहा है। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े को फाड़ देते हैं। वही कई बार ले जाते हैं।

2 से 3 केस रोज आते हैं
मनोहरपुर सीएचसी के करीब साढ़े 8 माह के आंकड़ों पर नजर डाले तो ज्ञात होता हैं कि प्रतिदिन रेबीज के इंजेक्शन लगाने के लिए करीब दो से तीन व्यक्ति पहुंच रहे हैं। वहीं बहुत से व्यक्ति अन्य निजी चिकित्सालय व मेडिकल से भी रेबीज का टीका प्राप्त कर उपचारित हो रहे हैं। वहीं कुछ मरीज सीधे एसएमएस अस्पताल से भी इलाज के लिए पहुंचे हैं। जिन्हें बंदरों ने काटा हुआ है। डॉ. एल.एन सैनी ने बताया कि रेबीज के इंजेक्शन श्वान व बंदरों को लगाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश रेबीज के टीके बंदरों के काटे हुए के लगाए गए हैं।

आमजन की जेब पर भारी
बंदरों की बड़ी संख्या में मौजूदगी आमजन की जेब पर भारी पड़ रही हैं। खुले मकान वालों को सामान पार होने व काटने पर इलाज करवाने का खर्च वहन करना पड़ रहा हैं। वही अन्य लोग बंदरों से बचने के लिए लोग हजारों रुपए खर्च कर लोहे के जाल लगवा रहे हैं। बंदर हर रोज किसी वार्ड में बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों, महिलाओं को काट रहे हैं। वार्डों के लोगों ने कहा कि नगर पालिका प्रशासन को चाहिए कि वह बंदरों को पकड़वा कर इनके आतंक से छुटकारा दिलाए।

यह भी पढ़ें : सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में गिरफ्तार पूजा सैनी ने किया बड़ा खुलासा

इनका कहना है...
बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाएं जाएंगे। आमजन को बंदरों के आतंक से निजात दिलाई जाएगी।

सुनीता प्रजापत , पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका मनोहरपुर