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स्वर्णिम आवाज के धनी कमेन्टेटर जसदेव सिंह का निधन

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Jasdev Singh passes away

स्वर्णिम आवाज के धनी कमेन्टेटर जसदेव सिंह का निधन

जयपुर। जाने माने कमेन्टेटर और पदमश्री जसदेव सिंह का मंगलवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे और उनके परिवार में पुत्र और पुत्री है। वह लम्बे समय से बीमार थे।

राजस्थान में सवाईमाधोपुर जिले के बौंली कस्बे में 18 मई 1931 को जन्मे सिंह ने क्रिकेट सहित कई खेलों में कमेन्ट्री की थी। इसके अलावा उन्होंने नौ ओलम्पिक और छह ऐशियाई खेलों के दौरान अपनी आवाज से श्रौताओं को खेलों का आंखों देखा हाल सुनाया।

सिंह ने खेलों के साथ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौकों पर भी अपनी आवाज से श्रौताओं को बांधे रखा। सिंह दुनिया में एकमात्र ऐसे कमेन्टेटर थे जिन्हें अन्तराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति ने ओलम्पिक आर्डर के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया।

केन्द्रीय खेल राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ट्वीट कर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुये कहा कि उनके निधन से एक युग का अन्त हो गया। उल्लेखनीय है कि सत्तर के दशक में जब दूरदर्शन खेलों का एकमात्र प्रसारणकर्ता था उस दौर में सिंह की आवाज हर घर में जानी पहचानी आवाज बन गई थी।

देश के सबसे लोकप्रिय खेल कमेंटेटर जसदेव ने जयपुर में ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू किया था और आठ साल बाद वह दिल्ली आ गए थे। उन्होंने करीब 35 साल तक दूरदर्शन में काम किया। इतने वर्षों में अपने पेशेवर कॅरियर में जसदेव ने नौ ओलम्पिक, आठ हॉकी विश्व कप और छह एशियाई खेलों में कमेंट्री की।

उन्हें इसके लिए ओलम्पिक खेलों के सर्वोच्च पुरस्कार ओलम्पिक आॅर्डर से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें आईओसी के पूर्व अध्यक्ष जुआन एंटोनियो समारांच ने दिया था । 70 और 80 के दशक को दूरदर्शन की खेल कवरेज का स्वर्णिम दौर माना जाता है। उस समय रवि चतुर्वेदी और सुशील दोषी के साथ जसदेव का नाम हर खेल प्रेमी की जुबान पर रहता था।

चतुर्वेदी और दोषी विशुद्ध रूप से क्रिकेट कमेंट्री किया करते थे जबकि जसदेव ने कमेंट्री पर समान अधिकार के साथ ओलंपिक, एशियाई खेल और हॉकी विश्व कप कवर किए। उन्होंने 1968 लेकर 2000 तक नौ ओलंपिक कवर किये। वर्ष 2000 के सिडनी ओलम्पिक उनके आखिरी ओलम्पिक थे।

एक समय कहा जाता था कि उनकी क्रिकेट और हॉकी की कमेंट्री इतनी दिलचस्प और धाराप्रवाह होती थी कि लोग कई बार टीवी की आवाज बंदकर रेडियो पर उनकी आवाज सुनते हुए मैच देखा करते थे। यह भी दिलचस्प बात है कि उन्होंने खुद कभी कोई खेल नहीं खेला था, क्रिकेट तो कतई नहीं।

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18 मई 1931 में राजस्थान के सवाई माधोपुर के बोली गांव में जन्मे जसदेव ने अपना कॅरियर समाचार वाचक के रूप में आकाशवाणी जयपुर से शुरू किया था। जसदेव की आवाज देश के कई ऐतिहासिक पलों को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनी थी, चाहे वो 1975 का हॉकी विश्व कप का फाइनल हो या फिर अंतरिक्ष में पहले भारतीय राकेश शर्मा का पहुंचना।

1963 से उन्होंने 48 वर्षों तक गणतंत्र दिवस की परेड का आंखों देखा हाल श्रोताओं तक पहुंचाया। जसदेव ने रेडियो कमेंट्री को नए आयाम दिए थे। जसदेव का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही किया जाएगा। जसदेव के निधन पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शोक जताते हुए अपने संदेश में कहा कि सिंह के निधन से रेडियो कमेंट्री के एक युग का अंत हो गया।


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