
रितुराज लोहार व डीसीपी साउथ राजर्षि राज। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। मुहाना थाने में 22 सितंबर को तबीयत बिगड़ने और फिर अस्पताल में 15 दिन भर्ती रहने के बाद हुई रितुराज लोहार की मौत के मामले में अब जांच जयपुर महानगर प्रथम के एसीएम-11 सौरभ बंसल कर रहे हैं। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया था और अब थाने के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांच के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इस न्यायिक जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि रितुराज की मौत के पीछे असल जिम्मेदार कौन है?
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सोना तस्करी व पैसों के लेनदेन के विवाद से हुई थी। नीमच निवासी प्रहलाद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके गांव के ललित ने कहा था कि प्रकाश (मृतक रितुराज के पिता) विदेश से सोना लाएगा, जिससे अच्छा मुनाफा होगा। सोना खरीदने के लिए प्रहलाद ने प्रकाश को ऑनलाइन करीब 7.45 लाख रुपए दिए थे। जब तय समय पर सोना नहीं मिला और उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो प्रकाश ने इनकार कर दिया।
प्रहलाद को जब पता चला कि प्रकाश मुहाना इलाके में एक होटल में रुका है, तो वह वहां पहुंचा। वहां उसे जानकारी मिली कि प्रकाश ने मनोज नामक एक अन्य व्यक्ति से भी सोना देने के नाम पर पैसे ले रखे हैं। इसके बाद, 22 सितंबर को प्रकाश अपने बेटे रितुराज को होटल में यह कहकर छोड़ गया था कि वह जल्द ही लौट रहा है।
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि 'रितुराज को पुलिस पकड़कर थाने नहीं लाई थी, बल्कि शिकायत करने वाले पक्ष के लोग ही उसे खुद थाने लेकर आए थे। थाने में सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। थाने पहुंचने के करीब दो घंटे बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिसकर्मी खुद मानवता दिखाते हुए उसे निजी अस्पताल लेकर गए थे। बाद में हालत अधिक गंभीर होने पर उसे एसएमएस अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया, जहां 5 अक्टूबर को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। थाने में उसके साथ कोई मारपीट नहीं हुई।'
मृतक की मां हेमा बाई ने 23 सितंबर को मुहाना थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी कि रितुराज ने फोन पर उन्हें बताया था कि उसे और उसके पिता को मनोज, लोकेन्द्र और महेश सहित 4-5 लोगों ने बंधक बनाकर रखा है, जिसके बाद फोन अचानक कट गया था। अगले दिन उन्हें सूचना मिली कि रितुराज को एक निजी अस्पताल के आइसीयू में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है। हालांकि, हेमा बाई ने अपनी शुरुआती शिकायत में किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई आरो या शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मारपीट के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। उन्होंने चेलावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
जयपुर. राज्य मानवाधिकार आयोग शहर के मुहाना थाने में कथित मारपीट से युवक की मौत मामले की स्वयं जांच करेगा। आयोग अध्यक्ष जीआर मूलचंदानी ने आयोग के महानिरीक्षक हिंगलाज दान और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संध्या यादव को इस बारे में निर्देश दिया। आयोग अध्यक्ष ने इन दोनों अधिकारियों से स्वयं के स्तर पर घटना की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। जांच के लिए घटना के गवाहों व चिकित्सकों से साक्ष्य लिए जाएंगे, वहीं मेडिकल रिपोर्ट की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि घटना के दिन से एक सप्ताह पहले तक की सीसीटीवी फुटेज ली जाए।
इस मामले में आरोप है कि युवक की प्रताडना के कारण मौत हुई और पुलिस ने झूठ छिपाने के लिए एंटीवेनम के दस इंजेक्शन लगवाकर 96 हजार रुपए का बिल भरा। सांप डसने की कहानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। आयोग ने पूर्व में इस मामले में पुलिस कमिश्नर, कलक्टर और एडीजी मानवाधिकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी।
Updated on:
08 Oct 2026 08:24 am
Published on:
08 Oct 2026 08:24 am
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