
दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए अपने जीवन को दांव पर लगाकर कार्य करने वाले सैकड़ों श्रमिकों को जिले में सिलिकोसिस बीमारी का दंश झेलना पड़ रहा है। इस बीमारी से श्रमिकों को आए दिन मौत की नींद सोना पड़ रहा है। मौत का यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की ओर से दौसा जिले में बीमारी से पीडि़त श्रमिकों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए शुरू की गई योजना नाकाफी साबित होती दिखाई दे रही है। स्थिति यह है कि बीमारी से जिले में अब तक करीब 82 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार दौसा जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में पत्थर एवं मूर्ति व्यवसाय से जुड़े करीब 641 श्रमिकों ने आवेदन किया गया था। इसमें से 559 सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित है तथा 82 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 165 श्रमिकों को सहायता मिलना बाकी है। श्रमिकों को दो वक्त की रोटी भी इसी कार्य से नसीब होती है। लेकिन परिवार में श्रमिक की मौत हो जाने के बाद परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। बीमार श्रमिकों के परिवारजनों ने बताया कि सरकार की ओर से समय-समय पर मेडिकल शिविर लगने चाहिए। लेकिन गिने-चुने शिविर ही लगने से उन्हें उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है। विभाग की ओर से मात्र श्रम कार्ड बनाकर ही अपने कार्य की इतिश्री कर ली जाती है। पूर्व में विभाग की ओर से पंजीयन के लिए उपखंड मुख्यालयों पर संचालित पंचायत समिति में पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाती थी। लेकिन 8 फरवरी के बाद यह कार्य अब जिला मुख्यालय पर कर दिया गया है। ई-मित्र के माध्यम से प्रक्रिया पूर्ण की जाती है। ऐसे में श्रमिकों को समय पर सही जानकारी नहीं मिल पाती है। साथ ही समय एवं धन की बर्बादी होती है।
यह है आर्थिक सहायता का प्रावधान
सरकार की ओर से वर्ष 2015 से सिलिकोसिस पीडि़तों की सहायता के लिए योजना शुरू की गई थी। जिसमें मारी से ग्रसित व्यक्ति को 1 लाख रुपए एवं मौत हो जाने पर तीन लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया था। लेकिन बीमार व्यक्ति को मिलने वाली राशि 'ऊंट के मुंह' में जीरे के समान है।
केस नंबर 1
चोरवाड़ा ग्राम के झाबरा माली की ढाणी निवासी गोरधन सैनी करीब ४ वर्ष से सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित है। परिवारजनों ने बताया कि उसके तीन सदस्य है तथा कमाने वाला वह स्वयं है। अब तक बीमारी पर करीब तीन से चार लाख रुपए लग चुके हैं। परिवार के सामने आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
केस नंबर 2
ग्राम पंचायत मूंडघिस्या के होड़ी का गोला निवासी गोविंदा राम सैनी गत पांच साल से बीमारी से ग्रसित है। सरकार की ओर से उपचार के लिए दी जाने वाली एक लाख रुपए की राशि भी नहीं मिली है।
केस नंबर 3
ग्राम पंचायत होडी का गोला में मल्लाराम सैनी तीन साल से बीमारी से ग्रसित है। परिवार में पांच सदस्य है। विभाग की ओर से मिली राशि अपर्याप्त साबित हुई है। परिवारजनों ने बताया कि परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पीडि़त का उपचार क राए या परिवार का खर्चा चलाए।
केस नंबर 4
होडी का गोला निवासी ही बाबूलाल सैनी गत तीन साल से बीमारी से पीडि़त चल रहा है। परिवार में पांच सदस्य है। परिवार की हालत दयनीय है। विभाग को आर्थिक सहायता की राशि एक लाख से बढ़ाकर देनी चाहिए।
श्रमिक नहीं कर पाते बचाव के उपाय
राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय बांदीकुई के प्रभारी डॉ. रामनिवास मीना के अनुसार पत्थर एवं मूर्ति उद्योग से जुड़े मजदूरों के कार्य करने के दौरान पत्थर का पाउडर आदि हवा में उड़कर मुंह में नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है। धीरे-धीरे यह पाउडर डस्ट मरीज के फेफड़ों मेें जम जाती है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है तथा हल्का फीवर आदि आने लग जाता है।
बचाव ही उपचार
चिकित्सा प्रभारी डॉ. मीना ने बताया कि इस बीमारी का बचाव ही उपचार है। कार्य करते समय मजदूरों को पूर्णतया सावधानी बरतनी चाहिए। मुंह एवं नाक पर मास्क लगाकर कार्य करना चाहिए। डस्ट आदि से दूर रहना चाहिए। वहीं समय-समय पर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराकर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच के लिए समय-समय पर मेडिकल शिविर आयोजित कराए जाते हैं तथा जिन मरीजों को सहायता नहीं मिली है। उन्हें सहायता मुहैया कराने के शीघ्र प्रयास किए जाएंगे। - विक्रम सिंह, जिला श्रम कल्याण अधिकारी, दौसा
Published on:
2 May 2018, 1:21 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.