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दस साल पुरानी परेशानी का होगा स्थाई समाधान, पहली बार अपनी दुकान-मकान तोड़ने के लिए लोग खुद लगा रहे हैं लाल निशान

पांच लाख लोगों की लाइफ लाइन मानी जा रही झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड को बिना किसी तरह की प्रशासनिक अमले और जाब्ते के बिना जेडीए ने इस कार्रवाई को पूरा किया
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जयपुर

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Rajesh

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Updated: 23 Apr 2018, 12:50 PM IST

Traders supporting JDA to shifted houses and shops for Jhotwara Elevated road in Jaipur

जयपुर। झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड के दायरे में आ रही दुकान व बिल्डिंग को तोड़ने के लिए जेडीए ने रविवार को तीसरे दिन भी लाल निशान लगाने व सर्वे का काम जारी रखा। पांच लाख लोगों की लाइफ लाइन मानी जा रही झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड को बिना पुलिस फोर्स के सर्वे और लाल निशान लगाने की इस कार्रवाई को अफसरों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जी हां, किसी तरह की प्रशासनिक अमले और जाब्ते के बिना जेडीए ने इस कार्रवाई को पूरा किया और इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि व्यापारियों को अब दस साल की परेशानी का स्थायी समाधान होता नजर आ रहा है। आपको बता दें कि जहां अपने प्रतिष्ठान और मकान टूटने पर जहां व्यापारी और लोग विरोध में खड़े हो जाते हैं वहीं झोटवाड़ा में पहली बार लोग खुद अपने घरों और दुकानों को तोड़ने के लिए लाल निशान लगा रहे हैं। इसे विकास की एक अच्छी पहल या नई शुरुआत कहा जा सकता है।

अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए दूसरे दिन भी जेडीए व प्रवर्तन विंग की कार्रवाई जारी रही थी। टीम ने शनिवार को 126 प्रतिष्ठानों पर लाल निशान लगाए। पिछले दो दिन में 578 में से 230 बिल्डिंग का सर्वे कर निशान लगाने की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। दूसरे दिन भी कार्रवाई के दौरान व्यापारियों ने जेडीए टीम को पूरा सहयोग दिया। व्यापारियों ने खुद ही आगे बढ़कर दुकानों की नापजोख करवाई। दिन भर बिना किसी पुलिस जाब्ते के इंजीनियरिंग विंग ने काम किया। गौरतलब है कि झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड दो विधानसभा क्षेत्रों के करीब पांच लाख लोगों की उम्मीद है। वर्ष 1999-2000 में बने झोटवाड़ा पुलिया के दौरान 5 साल तक विवाद चला। बावजूद इसके 2002 में संकरी पुलिया बना दी गई। आबादी बढ़ने के साथ ही यहां हर रोज दो से तीन किलोमीटर लंबा जाम लगा रहता है।

हालांकि इस दौरान जेडीए के मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन राजेंद्र सिंह सिसोदिया और जोन 6 के डिप्टी कमिश्नर मनीष फौजदार वहां मौजूद रहे। सर्वे फॉर्म भरकर मौके पर ही दुकानदारों व मालिक से हस्ताक्षर भी करवा लिए गए ताकि मुआवजे या पुनर्वास के समय किसी तरह का परेशानी या विवाद न हो। 166.73 करोड़ की लागत के प्रोजेक्ट के लिए जेडीए आधे से ज्यादा मकानों पर सर्वे की कार्रवाई कर चुका है। रविवार को 78 बिल्डिंगों का सर्वे कर मकान मालिक व किराएदारों से फॉर्म भरवाए गए। अब तक 308 बिल्डिंगों पर लाल निशान लगाए जा चुके है, लेकिन एक भी व्यापारी का विरोध सामने नहीं आया। हालांकि कुछ व्यापारियों ने 80 फीट से ज्यादा लंबाई पर निशान लगाने पर आपत्ति जताई, लेकिन बाद में सब शांतिपूर्ण रहा। बता दें कि झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड से करीब पांच लाख लोगों को फायदा होगा। ऐसे में जल्दी ही काम शुरू किया जाएगा।