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राजस्थान की ये खूबसूरत पांच हवेलियां, जिनकी पीएम मोदी भी कर चुके तारीफ, हर साल आते हैं 8 लाख पर्यटक

Rajasthan News: यहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद पांच हवेलियों का समूह ऐसा है, जिनके अंदर गर्मी प्रवेश नहीं कर पाती। सोनार दुर्ग, गड़ीसर तालाब और सम के धोरों के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर शहर के बीचों-बीच स्थित है पांच हवेलियों का समूह, जिन्हें पटवा हवेली भी कहा जाता है।
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जैसलमेर

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Kirti Verma

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Updated: 10 Dec 2023, 12:38 PM IST

jaisalmer_haweli.

Rajasthan News: यहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद पांच हवेलियों का समूह ऐसा है, जिनके अंदर गर्मी प्रवेश नहीं कर पाती। सोनार दुर्ग, गड़ीसर तालाब और सम के धोरों के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर शहर के बीचों-बीच स्थित है पांच हवेलियों का समूह, जिन्हें पटवा हवेली भी कहा जाता है। बताते हैैं कि सन 1805 में सेठ गुमानचंद पटवा ने अपने पांच बेटों के लिए इन आलीशान हवेलियों का निर्माण कराया था। 50 डिग्री तापमान की लू व अंगारे बरसाने वाली हवा को कैसे ठण्डा किया जाए, इसके लिए उन्होंने हवेलियों में कलात्मक जालियां इस तरह लगाई कि हवा भीतर आते ही शीतल होने लगे। वाटर हार्वेस्टिंग का ऐसा सिस्टम दिया कि पानी की बचत हो और यही पानी हवेली में बने निर्माण से हवा को भी ठंडा रखे। हवेलियां एक-दूसरे से ऐसे सटी हुई लगती हैं, मानो एक दूजे को स्पर्श कर रही हों।

पटवों की हवेली में तीन संस्कृतियों हिन्दू, जैन व मुस्लिम की झलक दिखती है। तत्कालीन समय में हिन्दू शासक थे, जैन निर्माणकर्ता थे और कारीगर मुस्लिम थे। गर्मी में भी शीतलता इसकी खास पहचान है। सात मंजिला हवेली में दो तल हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में भंवरा कहा जाता है। हवेली के भीतर वाटर हार्वेस्टिंग का बेहतर प्रबंध है, क्योंकि तब पानी की काफी कमी थी। मुख्य द्वार जमीन से पांच फुट ऊंचाई पर बना है, ताकि आंधी के दिनों में रेत घर में घुस न सके।
विजय बल्लाणी, विशेषज्ञ कला-संस्कृति

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प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके तारीफ
वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि हो सकता है आप में से कुछ लोग जैसलमेर में पटवों की हवेली देखने गए होंगे। पांच हवेलियों के इस समूह को विशेष तरीके से बनाया गया है। यह सारी आर्किटेक्चर न केवल लोंग सस्ट्रेनिंग होता था, बल्कि एनवारयमेंटली संस्ट्रेबल भी होता था। यानि पूरी दुनिया के पास भारत के आर्ट एंड कल्चर से बहुत कुछ जानने सीखने का अवसर हैै।

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