पटवों की हवेली में तीन संस्कृतियों हिन्दू, जैन व मुस्लिम की झलक दिखती है। तत्कालीन समय में हिन्दू शासक थे, जैन निर्माणकर्ता थे और कारीगर मुस्लिम थे। गर्मी में भी शीतलता इसकी खास पहचान है। सात मंजिला हवेली में दो तल हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में भंवरा कहा जाता है। हवेली के भीतर वाटर हार्वेस्टिंग का बेहतर प्रबंध है, क्योंकि तब पानी की काफी कमी थी। मुख्य द्वार जमीन से पांच फुट ऊंचाई पर बना है, ताकि आंधी के दिनों में रेत घर में घुस न सके।
विजय बल्लाणी, विशेषज्ञ कला-संस्कृति