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jaisalmer: पंचायत समितियों में आधी दुनिया को मिला पूरा हक, कलेक्ट्रेट में 10 पंचायत समितियों में प्रधान पदों का आरक्षण

जैसलमेर जिले की 10 पंचायत समितियों में से पांच में महिला प्रधान का नेतृत्व तय हो गया है। बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट में स्कूली बालिकाओं से निकाली गई लॉटरी में आरक्षण की तस्वीर साफ हुई। खुहड़ी, फतेहगढ़ और रामदेवरा अनारक्षित महिला, मोहनगढ़ एससी महिला और नाचना ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई।
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जैसलमेर. कलक्ट्रेट सभागार में लॉटरी प्रक्रिया के दौरान उपस्थित अधिकारी व जनप्रतिनिधि।

जैसलमेर. सीमावर्ती जैसलमेर जिले की 10 पंचायत समितियों में से आधी यानी 5 समितियों में महिलाएं प्रधान पद की कमान संभालेंगी। बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में स्कूली बालिकाओं की ओर से निकाली गई लॉटरी से इन समितियों में भविष्य के नेतृत्व का निर्णय हुआ। जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल की अध्यक्षता में आयोजित ड्रॉ ऑफ लॉट्स की बैठक में जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी, अतिरिक्त कलक्टर परसराम सैनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर, हरीश धनदेव, सवाईसिंह गोगली सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

लॉटरी के बाद खुहड़ी, फतेहगढ़ और रामदेवरा को अनारक्षित महिला वर्ग के लिए रखा गया है। इसके अलावा मोहनगढ़ पंचायत समिति को अनुसूचित जाति महिला और नाचना पंचायत समिति को अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इन पांचों सीटों पर केवल महिला उम्मीदवार ही प्रधान पद के लिए दावेदारी कर सकेंगी। वहीं शेष 5 समितियों में पुरुष और महिला चुनाव लडऩे के लिए पात्र होंगे। इनमें भणियाणा और सांकड़ा पंचायत समिति को अनारक्षित रखा गया है। वहीं, रामगढ़ पंचायत समिति को अनुसूचित जाति ओपन, राजमथाई को अन्य पिछड़ा वर्ग ओपन और जैसलमेर पंचायत समिति को अनुसूचित जनजाति ओपन घोषित किया गया है।

अरमानों पर फिरा पानी, बदलनी होगी रणनीति

प्रधान पदों के लिए निकाली गई लॉटरी के चलते जिले की ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले स्थापित नेताओं के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। वहीं भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए रणनीति बदलने की विवशता हो सकती है। अनारक्षित वर्ग के पुरुषों के लिए अब जिले में केवल सांकड़ा और भणियाणा प्रधान के पद ही दौड़ लगाने के लिए रह गए हैं। खुहड़ी, फतेहगढ़ और रामदेवरा में प्रधान पद पर आसीन होने का सपना संजो रहे नेताओं को अब परिवार की महिलाओं को आगे लाना मजबूरी बन गया है। अन्य 5 समितियों में आरक्षण प्राप्त जातियां ही प्रधान पद पर विराजित हो सकेंगे। जिला प्रमुख का पद पहले ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो चुका है। ऐसे में जिले की तीनों बड़ी आबादियों राजपूत, मुस्लिमों व अनुसूचित जाति के नेता इस पद से अगले पांच वर्ष तक के लिए वंचित हो गए हैं। इस वजह से भी पंचायती राज व्यवस्थाओं के चुनाव भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

सरपंचों की लॉटरी पर निगाहें

प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समितियों की आरक्षण लॉटरी के बाद अब सबकी निगाहें गुरुवार को उपखंड अधिकारी कार्यालयों में होने वाली सरपंचों की लॉटरी पर टिक गई हैं। इसमें सभी 266 ग्राम पंचायतों के सरपंचों का आरक्षण तय हो जाएगा। साथ ही वार्डपंचों की लॉटरी भी निकाली जाएगी। पंचायतीराज सेटअप में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।

जिला परिषद में यह रहेगी व्यवस्था

क्रम निर्वाचन क्षेत्र संख्या आरक्षण

1. 1 एससी सामान्य

2. 2 ओबीसी महिला

3. 3 ओबीसी सामान्य

4. 4 अनारक्षित

5. 5 एससी सामान्य

6. 6 अनारक्षित

7. 7 अनारक्षित महिला

8. 8 ओबीसी महिला

9. 9 एसटी सामान्य

10. 10 अनारक्षित महिला

11. 11 अनारक्षित महिला

12. 12 ओबीसी सामान्य

13. 13 अनारक्षित14. 14 अनारक्षित

15. 15 अनारक्षित महिला

16. 16 अनारक्षित महिला

17. 17 अनारक्षित18. 18 अनारक्षित

19. 19 अनारक्षित महिला

20. 20 एससी महिला

21. 21 अनारक्षित महिला