अधूरे कार्यों की कसक
यूं तो अभी झालरापाटन के शहरी क्षेत्र में अभी ज्यादा बैनर-पोस्टर नजर नहीं आ रहे, लेकिन चौपाल या दुकानों पर समूह में बैठे लोग चुनाव और मुद्दों पर चर्चा में व्यस्त नजर आए। झालरापाटन बाजार में कुछ लोगों से चुनावी मुद्दों को लेकर बात की तो जितेन्द्र पाटनी बोले, क्षेत्र में औद्योगिक विकास की जरूरत है। यहां एक भी बड़ा उद्योग नहीं है, जो थे, वे बंद हो गए। कोटा स्टोन उद्योग खत्म होने के कगार पर है। कृष्णकान्त अग्रवाल का कहना था कि झालावाड़ में बरसों से एयरपोर्ट की स्थापना की कवायद चल रही है, लेकिन यह सपना अधूरा है। एम.कॉम की छात्रा मुस्कान सक्सेना ने कहा, यहां शिक्षा के स्तर में गुणवत्ता की जरूरत है। काॅलेज और अन्य इंस्टीट्यूट तो खुल गए, लेकिन शिक्षकों के पद खाली हैं। सेवानिवृत्त व्याख्याता कैलाश चंद सोनी ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि स्कूल तो क्रमोन्नत कर दिए, लेकिन वहां संसाधनों का अभाव है। चुनाव के सिलसिले में राजे अब तक तीन बार यहां आई और पांच दिन रूकी। उनका चुनाव प्रचार कार्यकर्ता संभाले हुए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल चौहान लगातार गांवों में जनसम्पर्क कर रहे हैं।