नोटबंदी के समय से हालत खराब
छोटे नोटों की किल्लत नोटबंदी के समय से शुरू हुई थी। वह अब तक बरकरार है। पूर्व में कस्बे की एसबीआई बैंक भी चेस्ट ब्रांच हुआ करती थी। जहां काफी मात्रा में नोटों की आवाजाही थी, लेकिन व्यवसाय कम होने के कारण यहां चेस्ट ब्रांच खत्म कर दी है। खुल्ले पैसों की दिक्कत उन लोगों को ज्यादा आती है, जो ऑनलाइन लेन-देन नहीं करते हैं। हालांकि देश में ऑनलाइन पेमेंट का चलन बढ़ने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन समस्या का पूरा समाधान नहीं हुआ है। एटीएम से नकदी निकालने पर भी पांच सौ और दो हजार के नोट ही ज्यादा दिए जाते हैं। सौ रुपए के नोट काफी कम निकलते हैं। बाजार में दस, बीस और पचास रुपए के नोटों की ज्यादा किल्लत है।