भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा भारत के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में कुछ चयनित फलों पर अनुसंधान के लिए सन् 1976 में पांचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 10 केन्द्रों पर एक एपी सेस निधि योजना के तहत एक तदर्थ परियोजना आरंभ की गयी थी। छठी योजना के दौरान, इस तदर्थ योजना को इसी रूप में विलय करते हुए अखिल भारतीय समन्वित फल सुधार परियोजना (AICFIP) के सेल III के रूप में नामित किया गया। सातवीं योजना के दौरान इस परियोजना को अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्र फल समन्वित अनुसंधान परियोजना का नाम देकर एक स्वतंत्र परियोजना के रूप में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में मुख्यालय स्थापन्न के साथ पुनर्गठन किया गया था। अल्प अवधि में राष्ट्रीय शुष्क बागवानी अनुसंधान केन्द्र के द्वारा की गई प्रगति एवं शुष्क क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों के फलस्वरूप, 27 सितंबर, 2000 से इसे संस्थान का दर्जा दिया और इसका नाम केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर रखा गया। इसके पश्चात 01 अक्टूबर, 2000 से भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बंगलौर के गोधरा (गुजरात) स्थित केन्द्रीय बागवानी परीक्षण केन्द्र को इसमें विलय कर दिया गया था।