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दो साल की बीएड करवाने में जेएनवीयू लगा रहा तीन साल, विद्यार्थियों के भविष्य पर लटकी तलवार

विवि की ओर से स्पेशल बीएड में वीआई (दृष्टिबाधित), एचआई (श्रवण बाधित) सहित एमआर (मानसिक विमंदित) पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
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जोधपुर

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Harshwardhan Singh Bhati

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Updated: 6 Oct 2017, 4:24 PM IST

BEd course in JNVU

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जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में दो साल की विशेष बीएड करने में तीन साल लग रहे हैं। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित परीक्षाएं समय पर नहीं होने एवं परिणामों में देरी के चलते विद्यार्थियों का एक साल खराब हो रहा है। इसके बावजूद विवि प्रशासन परीक्षा एवं परिणामों को ठीक समय पर करने के लिए कदम नहीं उठा रहा है। इसका खमियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि विवि की ओर से स्पेशल बीएड में वीआई (दृष्टिबाधित), एचआई (श्रवण बाधित) सहित एमआर (मानसिक विमंदित) पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इसलिए हो रही देरी


विवि की ओर से चलाए जा रहे विशेष पाठ्यक्रम में कुल चार सेमेस्टर हैं। इनमें से प्रतिवर्ष दो-दो सेमेस्टर की परीक्षा होती है। कई बार कुछ सेमेस्टर के परिणाम देर तक नहीं आते। इसके चलते विद्यार्थियों को अगले सेमेस्टर की परीक्षा एक साल बाद देनी पड़ती है। इस बार के हालात देखें तो 2016 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के प्रथम और द्वितीय के परिणाम तो दिसम्बर 2016 तक जारी हो गए, लेकिन इस साल तृतीय सेमेस्टर के परिणाम अब तक नहीं आने से चतुर्थ सेमेस्टर के फार्म नहीं भर पाए हैं।

पिछले साल भी यही थे हालात

विवि की ओर से ये हालात सिर्फ इस बार नहीं हैं। पहले भी इस तरह होता आया है। विशेष बीएड पाठ्यक्रम में जिन विद्यार्थियों ने साल 2015 में प्रवेश लिया, उनके प्रथम सेमेस्टर का परिणाम 2017 में आया और इसके चलते इन विद्यार्थियों की बीएड भी देरी से हुई।

इंटर्नशिप में आधे से ज्यादा बीएड विद्यार्थी आवंटित स्कूल पाकर नाखुश!


शिक्षा विभाग के प्रारंभिक व माध्यमिक स्कूलों में इन दिनों प्रथम चरण में बीएड विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के लिए लगाया जा रहा है। इस बार विभाग ने प्रथम चरण में करीब तीन हजार स्कूलों में १२६४ भावी अध्यापकों को ऑनलाइन शाला दर्पण पोर्टल से स्कूल का चयन कर के दिया, जिसमें बीएड विद्यार्थियों को अपने चयन के आधार पर प्रथम जिले व प्रथम ब्लॉक की स्कूल दी गई है, उसमें भी करीब ८४४ जनों ने अपने स्थान को नापसंद किया है। शिक्षा विभाग ने परिवेदनाओं में विकलांग, गर्भवती महिला और तीन साल से छोटे बच्चे वाली मांओं को राहत दी है। उसके बावजूद शहर में एक भी स्थान खाली नहीं है। यहां केवल और केवल पारस्परिक आधार पर स्कूल बदले जा रहे हैं। इन दिनों शिक्षा विभाग में कई बीएड विद्यार्थी व उनके अभिभावक चक्कर निकालते देखे जा सकते हैं।