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Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर रिश्तों में प्रगाढ़ता की परम्परा का निर्वहन फलोदी में आज भी कायम है। हालांकि रोजगार की तलाश में फलोदी से बाहर गए परिवार के व्यक्तियों के लिए यह परम्परा निभाना थोड़ा मुश्किल है, फिर भी अधिकांश परिवार के लोग अक्षय तृतीया को घर पहुंचकर एक साथ मिलकर खीच व दही से बने रायते का लुत्फ उठाते है।
गौरतलब है कि जिसका कहीं से भी क्षय ना हो, उसे अक्षय कहते है और इसी अक्षयता को कायम रखने के लिए अक्षय तृतीया का पर्व अभी भी हमारे परिवार और दाम्पत्य जीवन का आधार स्तम्भ बना हुआ है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर होने वाला विवाह सदा अक्षुण रहता है। यही कारण है कि वर्तमान में भी सर्वाधिक शादी समारोह अक्षय तृतीया पर ही होते है। हालांकि इस बार अबूझ सावे पर भी पूर्व की भांति शादी समारोह नहीं है, फिर भी इसकी महता कम नहीं होती कि अक्षय तृतीया पर परिवार के सभी भाईयों का एक साथ एक ही थाली में अक्षय कलेवा करने की परम्परा भी है। जिसके पीछे का लॉजिक परिवार को एक सुत्र में बांधे रखना भी है।
कई पारिवारिक सदस्य भले ही बाहर बडे शहरों में जाकर बस गए हो, लेकिन अभी भी वे वहां परदेश में रहकर भी अपनी इस परिवार को अक्षुण रखने की परम्परा का निर्वहन करते है। कई परिवार ऐसे है, जहां सभी भाई एक साथ एक ही स्थान पर एकत्रिक होकर एक साथ अक्षय कलेवा का भोजन करते है और पूरे दिन एक साथ व्यतीत कर अपने जीवन के अनुभवों का साझा करते है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में यह परम्परा अब लुप्त होने लगी है, लेकिन अब भी बडे परिवारों में यह परम्परा देखी जा सकती है। शहर के पुष्करणा ब्राह्मण समाज के व्यक्ति अक्षय तृतीया पर अब भी एक साथ एक ही स्थान पर भोजन करते है।
फलोदी में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। वैसाख मास की हाळी अमावस्या से तृतीया तक अक्षय कलेवे का भोजन बनता है। अमावस्या को मूंग, चावल, दही का रायता व फली-बडी की सब्जी का पकवान बनता है, वहीं प्रथमा व द्वितीया को मूंग-बाजरी का खीच व अक्षय तृतीया को मूंग-गेहूं के खीच का कलेवा पकवान के तौर पर बनता है। खीच के साथ दही का रायता, इमली का खट्टा खीच के स्वाद के साथ भीषण गर्मी में अपने आपको तरोताजा रखने की शक्ति देता है। जिससे घी के साथ खीच, रायता व इमली का ज्यूस भी लोग भोजन के तौर पर लेते है।
सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को वैवाहिक जीवन, गृहप्रवेश, नव व्यापार, भवन निर्माण जैसे कार्यों के लिए यह अबूझ मुहूर्त माना गया है। वैदिक पंचांग अनुसार ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया कि वैशाख, शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 29 अप्रेल को शाम पांच बजकर 31 मिनट से प्रारभ होकर 30 अप्रेल को दोपहर 2.12 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार उदया तिथि के अनुसार 30 अप्रेल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
Updated on:
29 Apr 2025 03:24 pm
Published on:
29 Apr 2025 03:14 pm
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