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Dr. APJ Abdul Kalam Death Anniversary: यूपी के युवाओं में जज्बा कम नहीं.. फिर विकास कैसे पिछड़ा, एपीजे अब्दुल कलाम ने क्यों पूछा था ये सवाल?

Dr. APJ Abdul Kalam Death Anniversary: साल 2015 में यूपी पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने पूछा था कि यूपी में संसाधनों की कमी नहीं है और न ही युवाओं में जज्बे की कमी है। इसके बावजूद क्यों अधूरा है विकास..आइए बताते हैं।
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Dr. APJ Abdul Kalam told sources of development in UP

कानपुर कई बार आए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम।

Dr. APJ Abdul Kalam Death Anniversary: साल 2015 में उत्तर प्रदेश के एक कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि यूपी में संसाधनों की कमी नहीं है और न ही युवाओं में जज्बे की कमी है। वह उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी के बारे में कहा था कि प्रदेश में संसाधनों की कमी नहीं और न ही यहां के लोगों के जज्बे में कमी है, फिर भी प्रदेश का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए। हालांकि उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की प्रशंसा की थी।

इस दौरान उन्होंने प्रदेश में तत्कालीन सपा सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रशंसा की थी। कहा था कि मेट्रो, आगरा एक्सप्रेस-वे तथा सीजी सिटी जैसी योजनाएं प्रदेश को विकास के पथ पर दूर तक ले जाएंगी। इनका लाभ प्रदेश की गरीब जनता को भी मिलेगा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि 2020 तक प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय वर्तमान 33,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख 20 हजार करने की जरूरत है। उन्होंने अपने भाषण में कहा ‌था कि उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। देश का हर पांचवां युवा यहां का वासी है। उन्होंने बच्चों को सफलता का मूलमंत्र देते हुए कहा था कि जब तक 'जब तक लक्ष्य प्राप्ति न हो लड़ना बंद मत करो। किताबों से दोस्ती करके अपने ज्ञान को बढ़ाओ।'

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यूपी से हमेशा रहा खास रिश्ता
यूपी से भी उनका रिश्ता हमेशा खास रहा। वो कई बार कानपुर दौरे पर आए। कानपुर आईआईटी से अब्दुल कलाम का गहरा लगाव रहा। पहली बार वो 70 के दशक में यहां आए थे। उसके बाद 80 के दशक में दो बार उनका आईआईटी आना हुआ। 23 मई, 1990 में आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में वो बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। उन दिनों वो हैदराबाद में डिफेंस आर एंड डी लैब में निदेशक के पद पर थे। साल 2000 में हुए कानपुर आईआईटी के दीक्षांत समारोह में उनको डीएससी की मानद उपाधि से नवाजा गया था। उन दिनों वो भारत सरकार में प्रिंसिपल साइंटिस्ट हुआ करते थे। इसके बाद कलाम कानपुर आईआईटी में तैयार हुए विंड टनेल देखने साल 1996 में कानपुर आईआईटी आए थे।

मानव रहित विमान का मॉडल देख हुए थे खुश
आईआईटी के पीआरओ रवि शुक्ला के मुताबिक, हवाई जहाज, रॉकेट और रेलइंजन के आकार की जांच करने के लिए आईआईटी में विंड टनेल का प्रस्ताव खुद अब्दुल कलाम ने दिया था। कानपुर आईआईटी में विंड टनेल को देखकर वो काफी खुश हुए थे। साल 2012 में अब्दुल कलाम मानव रहित विमान का मॉडल देखकर बहुत प्रभावित हुए थे। उस मॉडल को जानने की चाहत में वो प्रोटोकॉल तक भूल गए थे। उन्होंने आईआईटी के छात्रों के साथ उस मानव रहित विमान पर एक घंटे तक बातचीत की।

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इन बातों पर देते थे जोर
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को बच्चों से बहुत प्यार था। वह हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के प्रेरित करते थे। उन्होंने बच्चों को बताया कि यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखें।
जब हम बाधाओं का सामना करते हैं तो हम पाते हैं कि हमारे अंदर साहस और लचीलापन मौजूद हैं जिसकी हमें स्वयं जानकारी नहीं थी, और यह तभी सामने आता हैं जब हम असफ़ल होते हैं, जरूरत हैं कि हम इन्हें तलाशे और जीवन में सफ़ल बनें।

महान सपने देखने वालों के महान सपने पूरे होते हैं।
जिंदगी सच में बेहतरीन बन जाती है जब हम जीवन में सही समय पर ‘थैंक्यू’ और ‘सॉरी’ बोलना जान लेते हैं। चाहे कोई कुछ भी कहे लेकिन अपनी गलती होने पर माफी मांगना और दूसरे जब आपके लिए कुछ करे तो उसका आभार प्रकट करना आपको साधारण से असाधारण बनाता है। मैं बहुत खूबसूरत नहीं हूँ लेकिन मैं उस व्यक्ति की तरफ अपना हाथ बढ़ा सकता हूँ जिसे मेरी मदद की जरूरत है... क्योंकि आपका दिल खूबसूरत होना चाहिए, चेहरा खूबसूरत हो या ना हो...

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“अलग तरीके से सोचें, कुछ नया करने का प्रयत्न करें, अपना रास्ता खुद बनाए असंभव को हासिल करें। अपने कार्य में सफल होने के लिए आपको एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाना होगा। जब तक पूरा भारत उठ कर खड़ा नहीं होगा, संसार में कोई हमारा आदर नहीं करेगा। इस दुनिया में डर की कोई जगह नहीं है केवल शक्ति की पूजा होती है।