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सैड़कों लोगों को छूकर जाती है मौत!, सिहर उठते हैं बच्चे व ग्रामीण, वीडियो में देखिये कैसे दांव पर तीन गांवों की जिदंगी
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सैड़कों लोगों को छूकर जाती है मौत!, सिहर उठते हैं बच्चे व ग्रामीण, वीडियो में देखिये कैसे दांव पर तीन गांवों की जिदंगी

राजधानी में गणेश विसर्जन के दौरान नाव संचालकों की लापरवाही और प्रशासनिक बेपरवाही से एक क्षण में कई घरों की खुशियां मातम में बदल गईं। इतने बड़े हादसे के बाद भी जिले में अबतक परेशानी का सामना करने वाले ग्रामीणों के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष इंतजाम नहीं हुए। जिले के तीन ऐसे गांव हैं जहां पर बारिश, नदी व बाणसागर के कारण प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है।
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कटनी

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Balmeek Pandey

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Updated: 18 Sep 2019, 12:26 PM IST

कटनी. राजधानी में गणेश विसर्जन के दौरान नाव संचालकों की लापरवाही और प्रशासनिक बेपरवाही से एक क्षण में कई घरों की खुशियां मातम में बदल गईं। (heavy rain) इतने बड़े हादसे के बाद भी जिले में अबतक परेशानी का सामना करने वाले ग्रामीणों के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष इंतजाम नहीं हुए। (boat running in villages) जिले के तीन ऐसे गांव हैं जहां पर बारिश, नदी व बाणसागर के कारण प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही है। विजयराघवगढ़ तहसील क्षेत्र का खेरवा गांव, बड़वारा तहसील क्षेत्र का भदौरा और बहोरीबंद तहसील क्षेत्र का ककरेहटा गांव, जहां के वाशिंदे अपने स्तर पर नाव का इंतजाम कर गांव से बाहर-आते जाते हैं। पुरानी नाव के सहारे ही रोज की नैया पार लग रही है। प्रशासन द्वारा नाव आदि का इंतजाम नहीं कराया गया। सोमवार को कलेक्टर द्वारा पुलिस, राजस्व व होमगार्डों को एक निर्देश जारी किया गया है कि नदियों में प्राइवेट नावों का संचालन न किया जाए, बल्कि होमगार्ड की निगरानी में व्यवस्था हो, लेकिन कहीं पर इंतजाम नहीं हुए।

 

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कांप जाती है रूह
ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन एकदम बेपरवाह बना हुआ है। खेरवा, ककरेहटा और भदौरा के ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर कई वर्षों से उन्हें इस समस्या से सामना करना पड़ रहा है। नाव पुरानी होने के कारण व उसमें छेद के कारण पानी भर जाता है। अधिकांश मात्रा में पानी भरने के कारण वह डूबने लगती है। इस दौरान वे सिहर उठते हैं। नाविक नाव चलाता है और ग्रामीणा नाव से पानी खाली करते हैं ताकि वे सुरक्षित बाहर निकल सकें। यह कई बार स्थिति बनती है। फिर ग्रामीण डामर आदि लगाकर नाव को ठीक करते हैं। इतनी गंभीर समस्या होने के बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। ग्रामीणों ने कहा कि प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को मौत छूकर जाती है, इसके बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं है।

 

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कई वर्षों से खेरवा बना है टापू
बरही थाना क्षेत्र का खेरवा गांव पिछले कई वर्षों से टापू बना हुआ है। गांवों के चारों तरफ पानी भरा है। यह बाणसागर डूब प्रभावित क्षेत्र है। अभी तक यहां विस्थापन की कार्रवाई प्रशासन नहीं कर पाया। गांव में लगभग 2 हजार से अधिक लोग रहते हैं। गांव के ही लोगों द्वारा एक नाव का इंतजाम किया गया है। महीने में या फिर रोजाना किराया देकर गुजारा करते हैं। कुछ दिनों के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यवस्था कराई गई थी, लेकिन दो साल से वोट योजना बंद है।

बड़वारा में भी समस्या
बड़वारा तहसील क्षेत्र का भदौरा गांव भी महानदी से घिरा हुआ है। इसके पीछे लगभग एक दर्जन गांव हैं जो बसाड़ी होते हुए जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में यहां के वाशिंदे महानदी से टूटी-फूटी नाव से उफनाती नदी को पार करते हैं। इतना ही नहीं सुबह-शाम छात्र-छात्रा भी जान हथेली में रखकर नाव से स्कूल आते-जाते हैं। पूर्व में हादसे भी हो चुके हैं, इसके बाद भी जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।

 

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ककरेहटा में नाव का सहारा
बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम ककरेहटा के पास सुहार नदी का जल स्तर बढ़ते ही पुल के ऊपर पानी भर जाता है। ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो जाता है। यह बारिश के सीजन में कई बार स्थिति बनी है। ग्रामीणों को गांव जाने व वहां से आने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। ककरेहटा में जल स्तर बढऩे से बचैया, बुधनवारा, तमुरिया का संपर्क भी टूट जाता है।

यह है जिले में व्यवस्था
आरपी त्रिपाठी, निरीक्षक नागरिक सुरक्षा ने कहा कि बहोरीबंद क्षेत्र के ग्राम गाड़ा में वोट खराब थी तो एक वोट भिजवाई है। एसडीएम ने सूचना दी है कि ककरेहटा की नाव में पानी भर जाता है। हमने उसे तत्काल बंद करने कहा है। एसडीएम जैसी वैकल्पिक व्यवस्था चाहेंगे वैसी हो जाएगी। भदौरा में व्यवस्था को लेकर कहा कि जबसे गांव बसा है तबसे एक तरफ उमड़ार नदी है दूसरी तरफ महानदी। दूरी से बचने के लिए लोग जान जोखिम में डालते है। अभी यहां इंतजाम के लिए कोई निर्देश नहीं मिले। खेरवा में गांव वाले खुद अपनी व्यवस्था किए हुए हैं।

 

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दूर है वैकल्पिक मार्ग
जितेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भदौरा नं. 2 के लिए मार्ग बसाड़ी गांव से होकर जाता है। महानदी में पुल न होने के कारण वर्षों से ग्रामीण नदी में तैरकर या फिर नाव से गांव पहुंचते हैं या फिर मजदूरी के लिए जाते हैं। प्रतिदिन जान हथेली में रखकर 14 गांव के लोग गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीणों के पास संकरी होते हुए एक वैकल्पिक मार्ग है, लेकिन उस मार्ग से उन्हें 8 से 10 किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है।

 

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इन गांवों के लोगों को परेशानी
सत्यभामा पटेल, सोनेलाल चौधरी के अनुसार भदौरा नं. 2 सहित परसवारा, संकरी, गोपालपुर, लदहर, कोहरवार, लोहरवारा, सलैया, नदावन, महुनी, ताली, सलैया, इमलिया, लालपुर सहित अन्य गांव बसे हुए हैं। इन सभी गांव के लोगों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर रोजमर्रा के काम के लिए बसाड़ी से आना-जाना पड़ रहा है। हर दिन उन्हें इस समस्या से जूझना पड़ रहा है।

विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी
छात्र करण, ज्योति, वर्षा, अर्चना, अनुज, अतुल, शिवम, रूपलाल, फूलिका राकेश, अनुराधा, राजकुमारी, नवीन, लक्ष्मी, राममनोहर, अमित, अंकित सीता, पूजा, पुष्पराज, रामू आदि ने बताया कि गांव में मिडिल तक स्कूल है। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई बसाड़ी, बड़वारा व कटनी में करते हैं। बच्चों ने बताया कि नाव में बैठते ही उनकी सांसें थम जाती है, जबतक नाव तट पर नहीं लगती दहशत में रहते हैं। कई बार नाव खराब होने, पानी अधिक होने के कारण वे एक सप्ताह से एक पखवाड़े तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई का नुकसान होता है और कई बार परीक्षा तक से वंचित रह जा जाते है।

 

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हो चुकी हैं कई मौतें
भदौरा के ग्रामीणों ने बताया कि तैर कर नदी पार करने, नाव पलटने की वजह से ग्रामीण हादसे का शिकार हो रहे हैं। हर साल 2 से 3 लोगों की मौत और एक दर्जन से अधिक मवेशियों की अकाल मौत हो जाती है। पिछले साल ही गांव के मुकेश रजक व शीतल कुमारी की डूबने के कारण दो वर्ष पहले मौत हो गई है। गांव में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक और शिक्षिका नदी पार कर स्कूल पहुंच रही हैं।

इस दौरान होती है मुसीबत
भदौरान के फूलचंद, विशेषर, अजय ने बताया कि गांव में यदि किसी का तबियत बिगड़ जाए, महिला को प्रसव पीड़ा हो या फिर कोई आपातकालीन स्थिति निर्मित हो जाने के कारण समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण चार पाई में उसे लेकर नदी पार कराते हैं और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचते हैं। रात के समय मुसीबत और भी भयावह हो जाती है, सुबह के इंतजार में ग्रामीणों को अपनों से हाथ धोना पड़ जाता है।

 

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मां की थमी रहती हैं सांसें

भदौरान की महिलाओं ने कहा कि बच्चे जब स्कूल के लिए निकलते हैं तो अभिभावकों की सांसें थम सी जाती है। जिगर के तुुकड़े के वापस लौटने पर जान में जान आती है। ग्रामीणों ने कहा कि हर सेकंड उनके पास से मौत छूकर जाती है। इसके बाद भी इस समस्या पर न तो जनप्रतिनिधियों को ध्यान है और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों का। ग्रामीणों की मानें तो सिवाय आश्वासन के उन्हें आजतक कुछ भी हाथ नहीं लगा है।

इनका कहना है
पुलिस, राजस्व सहित होमगार्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। किसी भी गांव में या फिर नदी व जलाशय में आवागमन के लिए प्राइवेट नाव का संचालन नहीं किया जाए। जहां पर जरुरत है तो वहां पर होमगार्डों की तैनाती में नाव चलाई जाए, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने।
शशिभूषण सिंह, कलेक्टर।