
सोना-चांदी के दाम में गिरावट से चमका सराफा बाजार (Photo Patrika)
Gold Silver Price in Kawardha: त्योहारों के सीजन में पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी से लेकर वाहन, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों की खरीदारी के लिए लोग बाजार पहुंचते हैं, लेकिन इस बार कवर्धा के बाजार में पुष्य नक्षत्र की रौनक सभी कारोबार में एक जैसी नहीं रही। सोने-चांदी के भाव में आई गिरावट ने सराफा बाजार को जरूर चमका दिया, लेकिन दूसरी ओर ऑटोमोबाइल, बर्तन, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी। कई दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही सामान्य दिनों जैसी ही रही।
व्यापारियों का कहना है कि जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। इस समय किसानों के हाथ में नकदी की कमी है। धान की फसल तैयार है, लेकिन उपज की बिक्री से मिलने वाली रकम अभी बाजार तक नहीं पहुंची है। यही वजह है कि शुभ मुहूर्त होने के बावजूद लोग बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। बाजार में इस बार सोने की चमक तो दिखी, लेकिन किसानों की जेब में नकदी नहीं होने से दूसरे कारोबारियों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं।
पुष्य नक्षत्र पर सराफा बाजार में ग्राहकों की अच्छी आवाजाही का प्रमुख कारण सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट रही। कुछ दिन पहले तक 20 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1 लाख 22 हजार 500 रुपए था, जो घटकर 1 लाख 19 हजार 500 रुपए पर पहुंच गया। यानी कीमत में सीधे 3 हजार रुपए की कमी आई। इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव भी 1 लाख 34 हजार रुपए से घटकर 1 लाख 30 हजार 500 रुपए रह गया। चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। एक सप्ताह पहले की तुलना में करीब 10 हजार रुपए कम होकर चांदी का भाव 1 लाख 60 हजार रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। कीमतों में इस कमी का असर सराफा दुकानों में दिखाई दिया। ग्राहक सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदी और भाव की जानकारी लेने पहुंचते रहे। सराफा व्यापारी सूचित बोथरा सहित अन्य कारोबारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार पुष्य नक्षत्र पर बाजार में अच्छी रौनक रही। सोने-चांदी के दाम कम होने से ग्राहकों का रुझान बढ़ा है।
सोने-चांदी के दाम में गिरावट से सराफा बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। वहीं ऑटोमोबाइल, बर्तन, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में उत्साह दिखाई नहीं दिया। व्यापारियों को धान बिक्री के बाद बाजार उठने की उम्मीद है। पुष्य नक्षत्र पर बाजार की दो तस्वीरें सामने आईं। सोना-चांदी सस्ता होने से सराफा कारोबार को ग्राहक मिले, लेकिन कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में किसानों के हाथ नकदी नहीं पहुंचने से दूसरे कारोबार प्रभावित रहे। यह केवल एक दिन की बिक्री का मामला नहीं, बल्कि जिले की ग्रामीण क्रयशक्ति और बाजार की निर्भरता को सामने लाने वाली हकीकत है।
पुष्य नक्षत्र पर सोना के साथ बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी की भी परंपरा है। इसके बावजूद बर्तन बाजार में खास उत्साह नहीं दिखा। बर्तन व्यापारी मोहित माहेश्वरी ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के हिसाब से बाजार में ग्राहकों की भीड़ नहीं पहुंची। दुकानों में सामान्य दिनों की तरह ही लोग खरीदी करने आए। जिस तरह की बिक्री और ग्राहकों की आवाजाही की उम्मीद इस शुभ अवसर पर रहती है वैसा माहौल नहीं बना। कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी कारोबारियों को अपेक्षित तेजी नहीं मिली। ग्राहकों ने जरूरत के सामान की खरीदी को प्राथमिकता दी, लेकिन बड़ी खरीदारी के लिए उत्साह कम रहा।
सराफा बाजार के उलट ऑटोमोबाइल कारोबार में पुष्य नक्षत्र का उत्साह नजर नहीं आया। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की खरीदी को लेकर कारोबारियों को जिस तरह की उम्मीद थी, वैसी स्थिति नहीं बनी। ऑटोमोबाइल डीलर अंकित अग्रवाल के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार बाजार कमजोर है। पिछले वर्ष ग्राहकों को जीएसटी में मिली राहत का फायदा मिला था, लेकिन इस बार वैसी स्थिति नहीं है। खेती-किसानी पर निर्भर जिले में धान की बिक्री के बाद ही बड़ी खरीदारी का सिलसिला तेज होता है।
चारपहिया वाहन बाजार में भी अपेक्षित रौनक नहीं दिखी। कार शोरूम मैनेजर आशीष पाण्डेय ने बताया कि इस बार बाजार पूरी तरह ठंडा नजर आ रहा है। जिले में बड़ी संख्या में लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं। किसानों के पास फि लहाल पैसों की आवक नहीं होने के कारण कारों की खरीदी प्रभावित हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार ग्राहक कम पहुंच रहे हैं। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि धान की बिक्री शुरू होने और किसानों के हाथ में रकम आने के बाद बाजार में तेजी आएगी। कारोबारियों के मुताबिक वाहन खरीदना बड़ा निवेश है।
Updated on:
2 Nov 2026, 1:45 PM IST
Published on:
2 Nov 2026, 1:44 PM IST
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