
आयुर्वेद का मूल विचार स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और बीमार व्यक्ति के उपचार पर आधारित है। इसकी दिनचर्या में संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग और मानसिक संतुलन को महत्व दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली में इन सामान्य आदतों की अनदेखी मोटापा, तनाव और जीवनशैली से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम को बढ़ा रही है।
बीमारी के बाद इलाज नहीं, पहले बचाव पर जोर
आयुर्वेद की खासियत इसकी निवारक दृष्टि को माना जाता है। दिनचर्या, खानपान और व्यक्ति की प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाता है। वात, पित्त और कफ के सिद्धांत के जरिए व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार-विहार तय करने की परंपरा रही है।
रसोई से जुड़ी परंपराएं फिर चर्चा में
हल्दी, जीरा, अजवाइन, सौंफ और अदरक जैसे मसाले भारतीय रसोई का हिस्सा रहे हैं। आयुर्वेद में इनका उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाता रहा है। आज भी इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों और औषधीय वनस्पतियों को लेकर लोगों में रुचि बढ़ी है। हालांकि हर व्यक्ति पर इनका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है और गंभीर बीमारी में विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
नींद और तनाव भी स्वास्थ्य का हिस्सा
देर रात तक मोबाइल चलाना, कम नींद और लगातार तनाव आधुनिक जीवन की बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं। आयुर्वेदिक दिनचर्या में समय पर सोने-जागने, योग, प्राणायाम और मानसिक शांति को महत्व दिया गया है। परिवार के साथ समय बिताना, नियमित दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता जैसी आदतें भी समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।
बच्चों के लिए
- घर का ताजा और पौष्टिक भोजन दें।
- दूध, दाल, हरी सब्जियां और मौसमी फल शामिल करें।
- पैकेज्ड फूड, ज्यादा नमक-चीनी और कोल्ड ड्रिंक सीमित करें।
- पर्याप्त नींद और रोज खेलना जरूरी है।
- मोबाइल और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें।
युवाओं के लिए
- नाश्ता छोड़ने की आदत बदलें और समय पर भोजन करें।
- फास्ट फूड, जंक फूड और अधिक कैफीन से बचें।
- भोजन में प्रोटीन, सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी रखें।
- रोज व्यायाम, योग या प्राणायाम के लिए समय निकालें।
- देर रात तक जागने और लगातार स्क्रीन देखने से बचें।
बुजुर्गों के लिए
- हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन लें।
- भोजन में दाल, सब्जियां, फल और पर्याप्त तरल शामिल करें।
- बहुत तला-भुना, ज्यादा नमक और मीठा सीमित करें।
- सुबह की हल्की धूप और नियमित टहलना उपयोगी है।
पुरानी पद्धति, आज की नई जरूरत
आयुर्वेद को अपनाने का मतलब आधुनिक चिकित्सा को छोड़ना नहीं, बल्कि जीवनशैली में संतुलन लाना है। विश्व आयुर्वेद दिवस का संदेश भी यही है कि स्वास्थ्य केवल बीमारी न होने का नाम नहीं, बल्कि बेहतर खानपान, दिनचर्या, नींद और मानसिक संतुलन से जुड़ा विषय है। - डॉ. विनोद रेवापाटी, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी।
Updated on:
23 Sept 2026 12:18 pm
Published on:
23 Sept 2026 12:18 pm
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