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दादाजी के लिए लाए पगड़ी, शर्ट व धोती, मिठाई में संजोरी, गाजे-बाजे संग निशान

30 वर्षों से निभा रहे हैं परंपरा...गुरु सुपड़ानंदजी महाराज की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं उनके अनुयायी
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खंडवा

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Amit Jaiswal

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Updated: 2 Jan 2018, 12:48 PM IST

dadaji dham khandwa Latest new year News in Hindi

dadaji dham khandwa Latest new year News in Hindi

खंडवा. महाराष्ट्र के चारड़ी और खेड़ी जलगांव के श्रद्धालु दादाजी धाम में गाजे-बाजे संग निशान लेकर पहुंचे। बड़े दादाजी और छोटे दादाजी महाराज के लिए पगड़ी, शर्ट, धोती व लाल रूमाल के साथ ही मिठाई में संजोरी लेकर आए। श्रद्धा व भक्ति के साथ दोनों दादाजी की समाधि पर ये सामग्री अर्पित की। करीब ढाई सौ अनुयायियों ने गुरु सुपड़ानंद महाराज की परंपरा का निर्वहन किया। ये करीब 30 वर्षों से लगातार यहां आ रहे हैं।


गुरु सुपड़ानंद महाराज के बारे में जानिए
जलगांव जिले के चोपड़ा तहसील चारड़ी मंदिर के अध्यक्ष बाजीराव डी पाटील ने बताया कि हमारे गुरु सुपड़ानंदजी महाराज बड़े पहलवान थे। खंडवा के दादाजी धाम में छोटे दादाजी महाराज की आज्ञानुसार कुश्तियां लड़ते थे। हमेशा जीत हासिल करते थे। सुपड़ानंदजी महाराज के गुरु सद्गुरु रेवानंदजी महाराज ने महाराष्ट्र में खंडवा के दादाजी धाम का प्रचार-प्रसार किया। हमारे गुरु ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने ही हमसे कहा कि ये दिन मनाया करो।


31 की रात में ही आ गए थे
महाराष्ट्र के ये भक्त 31 दिसंबर की रात में ही आ गए थे। भजन किए व भक्तिनृत्य किया। सोमवार सुबह भवानी माता मंदिर से निशान व पगड़ी गाजे-बाजे के साथ लेकर दादाजी धाम पहुंचे। प्रशांत सोनार, खेड़ी जलगांव के गुलाब भाई व अन्य मौजूद थे। दादाजी को निशान अर्पित कर इन्होंने सभी की सुख, समृद्धि, शांति व खुशहाली की कामना की।


कोई भी बनाए लेकिन मंदिर बन जाए
श्रद्धालुओं ने कहा कि दादाजी महाराज की जैसी इच्छा होगी, वैसा ही होगा। हम चाहते हैं कि यहां मंदिर बन जाए। भले ही वो कोई भी बनाए। आपस में प्रेम बना रहे, कटूता नहीं होना चाहिए। गरिमा कायम रखते हुए सब मिलकर आगे बढ़े। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि नए वर्ष के मौके पर दादाजी का सानिध्य पाकर हम धन्य हो गए। हमें आत्मिक रूप से बहुत अच्छा लगा। वैसे इन्होंने ये भी कहा कि अंग्रेजी कैलेंडर के इस नववर्ष से ये ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखते, ये गुड़ी पड़वा से ही नववर्ष मानते हैं। फिर भी तारीख के हिसाब से आए नववर्ष पर दादाजी धाम आकर इन्हें अच्छा लगा। श्रद्धालुओं ने कहा कि हर वर्ष इसी तरह आते रहेंगे और दादाजी का सानिध्य पाते रहेंगे।