
खंडवा. फोटो एआई
अल्प बारिश से जलस्रोतों में पानी की कमी और सिंचाई को लेकर अनिश्चितता के बीच किसानों पर बिजली की बढ़ी दरों का बोझ भी पड़ गया है। रबी फसलों की सिंचाई के लिए अस्थायी विद्युत कनेक्शन लेना इस बार किसानों की जेब पर भारी पड़ेगा। विद्युत कंपनी ने सिंचाई के लिए दिए जाने वाले अस्थायी कनेक्शन की दरें बढ़ा दी हैं। इससे पहले ही खाद, बीज और जुताई पर खर्च कर चुके किसानों की खेती की लागत बढऩा तय है।
खंडवा में स्थिति यह है कि जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता को लेकर किसानों के सामने असमंजस है। पर्याप्त पानी नहीं होने से सिंचाई कितने दिन कर पाएंगे, यह तय नहीं है। इसके बावजूद अस्थायी बिजली कनेक्शन लेने पर निर्धारित अवधि का पूरा शुल्क चुकाना होगा। ऐसे में किसानों को जरूरत से अधिक अवधि का कनेक्शन लेने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
अस्थायी कनेक्शन की बढ़ी दरों का असर अलग-अलग क्षमता के पंपों पर पड़ेगा। तीन महीने के कनेक्शन पर तीन एचपी पंप के लिए किसानों को पिछले साल की तुलना में 676 रुपए और पांच एचपी पंप के लिए 1099 रुपए अधिक देने होंगे। वहीं, चार महीने के कनेक्शन पर तीन एचपी पंप के लिए 939 रुपए और पांच एचपी पंप के लिए 1421 रुपए अतिरिक्त चुकाने पड़ेगे। बड़ी क्षमता वाले पंपों पर भी दरों में बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।
जिले में हर साल रबी सीजन के दौरान 14,500 से अधिक किसान सिंचाई के लिए अस्थायी विद्युत पंप कनेक्शन लेते हैं। हालांकि, इस बार 24 अक्टूबर तक केवल 543 किसानों ने ही आवेदन किया था। सीजन की शुरुआत होने के कारण फिलहाल आवेदनों की कम संख्या को अंतिम रुझान मानना जल्दबाजी होगी। किसान जलस्रोतों में उपलब्ध पानी और सिंचाई की जरूरत का आकलन करने के बाद ही कनेक्शन लेने का निर्णय कर रहे हैं।
इस बार सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता पर भी संशय बना हुआ है। इस बार जिले में औसत से करीब 4 इंच कम बारिश हुई है, जिसके चलते प्रमुख जलाशयों और सिंचाई के जलस्रोतों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध से बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाला ही पानी छोड़ा जा रहा है। जिला प्रशासन विभिन्न कार्यक्रमों में किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई के लिए समझाइश दे रहा है।
सिंचाई के लिए अस्थाई कनेक्शन की दरें मप्र पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा प्रदेश स्तर पर तय की जाती है। इस बार अस्थाई कनेक्शन के लिए 543 आवेदन आए हैं। अभी सीजन शुरू होने वाला है, आवेदनों की संख्या बढ़ेगी।
दिलीप कुमार बुके, अधीक्षण यंत्री विविकं
पहले ही किसानों पर सूखे की मार पड़ रही है। जहां पानी है, वहां भी किसान की लागत बिजली दरों के कारण बढ़ेगी। बिजली कंपनी अस्थायी कनेक्शन की अवधि और शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करे, ताकि सूखे की मार झेल रहे अन्नदाताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सके।
सुभाष पटेल, जिला मंत्री भाकिसं
Updated on:
26 Oct 2026, 12:32 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 12:32 PM IST
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