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सिंहस्थ 2028… श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ओंकारेश्वर में 47 साल पुराने झूला पुल की होगी अग्निपरीक्षा

-6-7 दिन चलेगी जांच, तब तक श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगाई रोक -दिल्ली से पहुंची सीआरआई टीम, पुल के नीचे उतरकर खंगाली जाएगी हर कड़ी
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खंडवा

•

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Manish Arora

•

Oct 06, 2026

Omkareshwar Bridge

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करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का साक्षी रहा ओंकारेश्वर का 47 साल पुराना झूला पुल अब अपनी सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है। पुल कितना मजबूत है, कितना भार सह सकता है और आने वाले वर्षों में बढ़ते श्रद्धालुओं के दबाव को झेल पाएगा या नहीं -इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच से तलाशा जा रहा है। मप्र लोक निर्माण विभाग के अनुरोध पर दिल्ली से सीआरआई की विशेषज्ञ टीम ओंकारेश्वर पहुंच चुकी है। जांच के लिए करीब एक सप्ताह पुल को आवागमन के लिए बंद रखा जाएगा।

भार क्षमता का किया जाएगा परीक्षण

जांच के दौरान झूला पुल की निर्माण गुणवत्ता, मौजूदा स्थिति, दरारों, मटेरियल की मजबूती और भार सहने की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। पुल के नीचे तक पहुंचने के लिए दोनों ओर गार्डर के नीचे 10-10 पत्तियों को काटकर अस्थायी झूला तैयार किया गया है। इसके बाद पुल के नीचे बारीकी से निरीक्षण के लिए स्लाइडिंग झूला भी बनाया जाएगा। एपीकोन रियल इंफ्रा कंपनी के प्रोजेक्ट इंजीनियर राजेश मिश्रा की देखरेख में झूला तैयार करने का काम पूरा किया गया है। अब विशेषज्ञ पुल के उन हिस्सों तक पहुंचेंगे, जिन्हें सामान्य निरीक्षण के दौरान देख पाना संभव नहीं होता।

1972 में शुरू हुआ था निर्माण, 1979 में खुला

ओंकारेश्वर तीर्थ नगरी में जेपी चौक से बड़ चौक को जोडऩे वाला यह पहला प्रमुख पुल था। इसका निर्माण 1972 में शुरू हुआ और सात साल बाद 1979 में पूरा हुआ। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम कौशिक और मध्यप्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री जबर सिंह ने इसका लोकार्पण किया था। तब से लेकर अब तक यह पुल करोड़ों श्रद्धालुओं के आवागमन का प्रमुख माध्यम रहा है। समय के साथ पुल की उम्र बढ़ी और श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। यही वजह है कि अब इसकी संरचनात्मक मजबूती और वास्तविक भार क्षमता की विस्तृत जांच कराई जा रही है।

सिंहस्थ से पहले इसलिए अहम है टेस्ट

आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर ओंकारेश्वर में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बढऩे की संभावना है। ऐसे में पुल की मौजूदा क्षमता कितनी है और बढ़े हुए दबाव में यह कितना भार सुरक्षित रूप से उठा सकता है, इसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जांच पूरी होने तक बंद रहेगा पुल

लोक निर्माण विभाग के एसडीओ गोरेलाल सोलंकी ने बताया कि पुल की पूरी जांच में करीब 6 से 7 दिन का समय लग सकता है। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से पुल को श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए बंद रखा जाएगा। अब सात दिन की इस तकनीकी पड़ताल में तय होगा कि आस्था के इस पुराने सेतु की नींव और ढांचा आने वाले वर्षों की भीड़ का भार उठाने के लिए कितना तैयार है।