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उच्च शिक्षा की कठिन है डगर, सरकारी महाविद्यालयों का ऐसा है हाल कि युवा कतरा रहे प्रवेश लेने से

सरकारी कॉलेजों की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही
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कोरबा

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Shiv Singh

•

Updated: 27 Jun 2018, 11:35 AM IST

सरकारी कॉलेजों की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही

सरकारी कॉलेजों की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही

कोरबा. सरकार का पूरा फोकस स्कूली शिक्षा तक सीमित रह गया है। सारे नियम और नए-नए आदेश स्कूलों तक ही सीमित हैं। इधर जिले के कॉलेजों में प्राध्यापकों के 30 फीसदी पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षा का स्तर लगातर गिर रहा है। सरकारी कॉलेजों की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही है।


12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में दाखिले का दौर जारी है। जिले के कालेजों में प्रोफेसरों की कमी होने से वहां की स्थिति चिंताजनक है। बावजूद इसके शासन से भर्ती के लिए फिलहाल कोई कार्ययोजना नहीं है। हैरानी वाली बात यह भी है कि जब सरकारी कॉलेज में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के पद ही रिक्त हैं, तो यहां पढाएगा कौन? एक शगूफा यह भी है कि रिक्त पदों के स्थान पर कॉलेज स्तर पर ही ऐसे युवाओं को अतिथि व्याख्याता के पद पर हर वर्ष भर्ती किया जाता है, जिन्हें सत्र समाप्त होते ही कार्यमुक्त भी करने का नियम है। अतिथि व्यख्याता भी साल भर कॉलेज में अनुभव लेते हैं और अपने रास्ते चले जाते हैं। इन्हें कॉलेज में अध्यापन का कोई खास अनुभव नहीं होता।

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ऐसे में कुछ जागरूक अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित भी हंै। जीवन भर की पढ़ाई की असली परीक्षा महाविद्यालय की शिक्षा ग्रहण करने के बाद ही शुरू होती है। कई विभाग और संस्थान कॉलेज में प्राप्तांकों के आधार पर ही सीधी भर्ती करते हैं। सरकार ने हाल ही में कॉसमोस योजना के तहत स्कूलों में शिक्षकों के बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था कर दी है। हर हफ्ते कोई न कोई नया आदेश जारी किया जाता है। लेकिन कॉलेज के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं है। पद खाली होने के बावजूद कार्यरत प्राध्यपकों पर भी कोई खास दबाव नहीं होता।


हरदीबाजार में पदों को रिवाईज की जरूरत
शासकीय ग्राम्य भारती महाविद्यालय हरदीबाजार जिले में ग्रामीण बेल्ट का सबसे बड़ा कॉलेज है। जहां वर्तमान में कुल छात्रों की संख्या 1814 है। जबकि यहां प्राध्यपक का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। हरदीबाजार में सहायक प्राध्यापक के कुल 17 पद स्वीकृत हैं। जिसमे से 14 कार्यरत हैं जबकि तीन पद रिक्त हैं।


चार कॉलेज में प्राचार्य ही नहीं
शिक्षकों की कमी ही उच्च शिक्षा में बाधा नहीं है। जिले के चार सरकारी कॉलेज करतला, मिनीमाता, बरपाली और हरदीबाजार में नियमित प्राचार्य के पद भी रिक्त हैं। जिले के ये चारों महत्वपूर्ण शासकीय महाविद्यालय बिना प्राचार्य के ही चल रहे हैं। जहां का काम प्रभारी प्राचार्य देख रहे हैं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।


पीजी कॉलेज में 36 फीसदी पद खाली
जिले के लीड कॉलेज में प्राध्यापक के आठ सहित सहायक प्राध्यापकों के कुल 47 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 30 ही कार्यरत हैं। यह स्थिति तब है, जब पीजी कॉलेज में प्रवेश के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पद्र्धा है। प्रथम वर्ष के बीए की 200 सीटों के लिए 650, बीएससी की 300 सीटों के लिए 1154 तो बी.कॉम की 200 सीटों के लिए 600 छात्रों ने प्रवेश लेने के लिए आवेदन किया है। छात्रों का रूझान ज्यादा होने के बावजूद भी प्रोफेसरों के पद रिक्त ही हैं। पीजी कॉलेज में वर्तमान छात्रों की कुल दर्ज संख्या 2611 है।


सभी कॉलेजों को मिलाकर 46 पद खाली
जिले के सभी नौ सरकारी कॉलेज पीजी, मिनीमाता, एमडीपी कटघोरा, भैसमा, दीपका, करतला, बरपाली, हरदीबाजार व पाली को मिलाकर प्राध्यापक व सहायक प्राध्यापकों के कुल 157 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 111 पद भरे हुए हैं, जबकि 46 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों में अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, गणित, भौतिकी और रासायन जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। अलग-अलग कॉलेजों में इन विषय विशेषज्ञों से छात्र अध्यापन का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।


-रिक्त पदों की संख्या के अनुसार विवि के आदेश पर प्रत्येक वर्ष शैक्षणिक सत्र के लिए अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाती है। जिससे काफी हद तक व्यवस्था बनी रहती है।

-डॉ. आरके सक्सेना, प्राचार्य, लीड कॉलेज